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Foreign policy क्या है?

Foreign policy क्या है?

Foreign policy को आप सब विदेश नीति के नाम से भी जानते हैं। आम भाषा में इसे विदेश नीति के नाम से ही जाना जाता है। आज हम इसी के बारे में बात करने वाले हैं की Foreign policy क्या है?

अगर आप किसी से Foreign policy के बारे में पूछेंगे तो हो सकता है उसे इस बारे में न पता हो लेकिन अगर आप किसी से विदेश नीति के बारे में पूछेंगे तो वो आपको इससे जुड़ी कोई न कोई बात जरूर बता देगा।

विदेश नीति में वो सारी चीज़ें आती हैं जो एक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होती हैं।

ये एक ऐसी योजना होती है जो हर एक राष्ट्र अपने हित, कल्याण और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनाता है। इसी के तहत अंतरराष्ट्रीय सम्बन्धों को भी रखा जाता है। कोई भी राष्ट्र किसी अन्य राष्ट्र से कैसे सम्बंध बनाएगा ये विदेश नीति का ही एक अंश होता है।

इसको एक उदाहरण के तौर पर समझने की कोशिश करते हैं। जैसे बीच में India और China के बीच सम्बन्ध अच्छे नहीं थे। दोनों में टकराहट हो गयी थी। ऐसे में India ने China के तमाम Apps को Ban कर दिया था। तो ये सब India की विदेश नीति का ही एक अंग था। इसी तरह से बार बार अलग अलग मुद्दों को लेकर अलग अलग देशों के साथ हर एक देश कोई न कोई रणनीति तैयार करता है। ये सब क्या है आखिर? सब कुछ Foreign policy ही तो है।

इससे हर देश यह निर्धारित करने में सफल हो पाता है कि उसे किस देश के साथ कैसे सम्बंध स्थापित करने है, किसके साथ सम्बन्ध स्थापित करने हैं और किससे दूरी बनाकर रखनी है। हर एक राष्ट्र की अपनी एक Policy होती है जिसकी वजह से वो दूसरों देशों के साथ खुद का एक Relation बना पाने में समर्थ होते हैं।

जो भी राष्ट्र की नीति होती है, उस नीति का पालन राष्ट्र को हर हाल में करना ही होता है फिर चाहे राष्ट्र को किसी भी कूटनीति का मदद क्यों न लेनी पड़ी।

दोस्तों तो आज हम ये Article इसी Topic पर आप सबके लिए लेकर आए हैं। इस Article में हम आप सभी को विदेश नीति के बारे में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं। इसके बाद आपको इससे जुड़ा कोई भी Doubt नहीं रहेगा। चलिए फिर शुरू करते हैं।

क्या होती है Foreign policy?

एक तरह से हम इसको इस तरह से भी समझ सकते हैं कि हर एक राष्ट्र के Development के लिए ये बहुत ही आवश्यक है। इससे हर एक देश अपने हितों को पूरा करता है और अपने कल्याण और आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ही इसको एक साधन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। ये राष्ट्रों के द्वारा तैयार की गई एक रूपरेखा होती है। इसी के अनुसार ही सारी गतिविधि जो भी होती है उनका निर्धारण किया जाता है। फिर इसके बाद उनका क्रियान्वयन किया जाता है।

अगर विदेश नीति की बात करें तो इसकी International politics में भी बहुत ही अहम भूमिका होती है। यह इसका निर्धारण करती है। इसके बाद किसी भी योजना का क्रियान्वयन करवाने में भी ये कार्य करती है।

इसमें अलग अलग राज्य शामिल होते हैं। हर राज्य अपने हिसाब से अपनी अपनी विदेश नीति का निर्धारण करते हैं। राज्य निर्धारण करने का काम दूसरे राज्यों की नीतियों और विचारधाराओं के अनुरूप करते हैं। इससे होता क्या है कि राज्य अपने हित मे काम कर पाता है और सभी राष्ट्रों के बीच मे एक समायोजन को स्थापित किया जाता है।

Foreign policy एक तरह से सभी राष्ट्रों के लिए मार्ग प्रशस्त करने का काम करती है। एक तरह से हम कह सकते हैं कि विदेश नीति एक सम्मिलित रूप होती है  राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं अंतरराष्ट्रीय भावनाओं का।

इसी की मदद से हर एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के साथ सामंजस्य स्थापित कर पाने में सक्षम हो पाता है। इससे एक देश दूसरे देश के साथ बहुत ही सरल तरीके से तालमेल बिठा पाता है और अपने हित मे काम कर पाता है।

अभी हम सब देख ही रहे हैं कि किस तरह से राष्ट्रों के बीच दूरियां पैदा होती जा रही हैं। कहीं चीन और भारत में कड़वाहट है तो कहीं अमेरिका और चीन में कड़वाहट है। ऐसे में इन सभी स्थितियों को देखते हुए एक बात तो साफ हो जाती है कि राष्ट्र आपनी अपनी Foreign policy को लेकर कुछ हद तक अभी लापरवाह हैं। सभी राष्ट्रों को ऐसी रणनीति तैयार करनी चाहिए जिससे उनकी विदेश नीति में मित्रता और मधुरता की भावना नज़र आए।

कोई भी देश तभी विकास की राह पर चल पाता है जब उसकी विदेश नीति काफी गुणवत्ता व्याप्त हो। इसीलिए इसको सामान्य तौर पर अगर समझें तो ये अन्य देश के साथ संबंधों, व्यापार नियमों, राजनीतिक संबंधों, आर्थिक संबंधों एवं सामाजिक संबंधों की योजना की रूपरेखा तैयार कर उसका क्रियान्वयन करना होता है।

जॉर्ज मोडेल्स्की के अनुसार विदेश नीति क्या है?

इन्होंने विदेश नीति को एक परिभाषा से समझाने की कोशिश की है। इनके अनुसार ‘विदेश नीति विदेश नीति एक राज्य की गतिविधियों का सुव्यवस्थित व विकासशील रूप है, जिसके द्वारा एक राज्य अन्य राज्यों के व्यवहार को अपने अनुकूल बनाने अथवा यदि ऐसा न हो पाये तो अन्तर्राष्ट्रीय वातावरण के अनुसार बदलने का प्रयास करता है।’

अगर इसकी विवेचना की जाए तो निम्न बातें सामने आती हैं –

  1. एक देश अपनी आवश्यकता के हिसाब से गतिविधियों में परिवर्तन या फिर उन पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है।
  2. कोई भी राष्ट्र अपनी इच्छा के अनुसार दूसरे राष्ट्र की गतिविधियों पर भी नियंत्रण कर सकता है।
  3. इससे अंतरराष्ट्रीय सम्बन्धों का विकास किया जाता है।
  4. इससे राष्ट्र अपनी गतिविधियों का व्यवस्थित तौर पर Development कर सकते हैं।

क्रिस्टल व Anderson के अनुसार विदेश नीति क्या है?

इनके अनुसार ‘Foreign policy, नीति के सामान्य सिद्धांतों का निर्धारण एवं क्रियान्वयन करती है जिसके द्वारा किसी राज्य के आचरण को प्रभावित करके अपने महत्वपूर्ण हितों की सुरक्षा एवं पुष्टीकरण करता है।’

इस परिभाषा से हम निम्न बात सामने आती हैं –

  1. इसे राष्ट्र अपने हित के लिए इस्तेमाल करते हैं तथा उनका Development करते हैं।
  2. इससे नीति का निर्धारण व उनका क्रियान्वयन किया जाता है।
  3. इससे दूसरे राष्ट्रों के Behavior को अपने हित के हिसाब से प्रभावित किया जाता है।

भारत की Foreign policy के निर्धारक तत्व क्या है?

India की जो Foreign policy हैं उसके निर्धारक तत्व निम्न हैं –

  1. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा – India की Policy में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ाना भी शामिल है।
  2. राष्ट्र का हित – Foreign policy फिर चाहे किसी भी देश की क्यों न हो, सबकी Policy की List में सबसे पहले राष्ट्र के कल्याण और हित की ही बात सामने आती है। इससे हर एक देश इसी कोशिश में लगा रहता है कि उसके राष्ट्र के जो भी स्वार्थ हैं वो Safe और Secure रह पाएं। हालांकि समय समय पर इसमें ज़रूरत के हिसाब से Changes लाए जाते हैं।
  3. सांस्कृतिक कारकों के लिए – अब आप लोग को लग रहा होगा कि इसका भला कौन सा काम। तो दोस्तों किसी भी Foreign policy को निर्धारित करने के लिए सांस्कृतिक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कोई भी राष्ट्र अपनी मर्यादाओं, परम्पराओं और प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए ही नीति का निर्धारण करता है।
  4. अन्य राष्ट्रों के मध्य मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध बनाए रखना – India की विदेश नीति में ये भी शामिल हैं। इससे दूसरे राष्ट्रों के मध्य मैत्रीपूर्ण सम्बंध को स्थापित किया जाता है।
  5. राष्ट्र का आदर्श और प्रतिष्ठा – इससे हम आसानी से समझ सकते हैं। जैसे पाकिस्तान को ही ले लीजिए वो आतंकवाद का समर्थक करता है तो ऐसे में वो अपनी Foreign policy में उग्रता दिखाएगा। इसके साथ ही वो युद्ध का साधन अपनाएगा और दूसरे राष्ट्रों को कमज़ोर करने की कोशिश करेगा। वहीं जो देश शांत हैं वो अपनी Foreign policy में हमेशा शांति और अहिंसा को ही अपनाने की कोशिश करेगा। यही होते हैं किसी भी विदेश नीति में आदर्श के सिद्धांत।
  6. भौगोलिक स्तिथि – इसका तो विशेष महत्व होता है। ये दो तरह से किसी भी राष्ट्र को प्रभावित करती है। एक तो देश के अंदर उपस्थित Resources और फिर उनका उपयोग।

भारत की विदेश नीति के क्या आदर्श हैं?

India की Foreign policy के कुछ अपने आदर्श और सिद्धांत हैं जो इस प्रकार से हैं –

विदेश नीति के निर्धारक तत्व कौन से हैं;-

ये कुछ महत्वपूर्ण तत्व हैं जो विदेश नीति की योजना को सफल बनाते हैं –

  1. विदेश नीति के निर्माणकर्ता – Foreign policy हो या कोई भी अन्य Policy हो, इन सबको उसको बनाना चाहिए जिसको इस क्षेत्र में Knowledge हो और इसके बारे में अनुभव हो। इसीलिए इसके निर्धारक तत्व में निर्माणकर्ताओं को भी शामिल गया है। जितने योग्य और अनुभवी व्यक्ति इसकी रूपरेखा तैयार करेंगे उतनी ही सफल ये नीति भी होगी। वहीं अगर किसी भी नीति को किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा बनाया जाता है जिसको इसका Knowledge ही न हो और बुद्धिहीन हो तो फिर समझ लीजिए कि नीति का सफल होना संभव ही नहीं है। इसीलिए हमेशा इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जिन व्यक्तियों द्वारा Policy का निर्माण किया जा रहा है वो कितने योग्य और पढ़े लिखे हैं।
  2. प्राकृतिक संसाधन – जो राष्ट्र Nature में जितने ज्यादा सक्षम होते हैं उनके पास Natural resources उतने ही ज्यादा होते हैं। हम आपको बता दें कि Natural resources में Petroleum, coal, oil, सोना, चांदी आदि जैसी चीज़ें आती हैं। ऐसे में जिस राष्ट्र के पास इसकी ज्यादा Quantity उपलब्ध होती है वो आर्थिक रूप से काफी मजबूत राष्ट्र माने जाते हैं। यही कारण है कि ऐसे देश से हर देश मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करना चाहते हैं।
  3. तकनीकी, औद्योगिक एवं वैज्ञानिक स्तर – जब राष्ट्र का तकनीकी, औद्योगिक एवं वैज्ञानिक स्तर एकदम Hifi होता है तभी किसी भी राष्ट्र का विकास सफल हो पाता है। जो राष्ट्र इन चीज़ों में सक्षम होते हैं, उनसे हर कोई मदद मांगने के लिए आगे आता है। इसीलिए ऐसे में सम्बन्धों को घनिष्ठ बनाना बेहद आवश्यक है।
  4. सैन्य एवं आर्थिक शक्ति – हर देश को खुद को बचाने के लिए सैन्य शक्ति चाहिए ही होती है। सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए ज़रूरी है कि राष्ट्र आर्थिक रूप से मजबूत हो। जैसे अभी भारत ने Rafale को रूस से लिया क्योंकि भारत को अपनी सैन्य ताकत को और मजबूती प्रदान करनी थी। भारत ने ये सौदा इसलिए किया क्योंकि उसकी आर्थिक स्तिथि उसे इसको खरीदने की मंजूरी दे रही थी। इसमें अंतरराष्ट्रीय सम्बंध आपको देखने को मिल रहा है। इसीलिए Foreign policy का ये भी महत्वपूर्ण तत्व है।
  5. नेतृत्व की लोकप्रियता – जो राष्ट्र का नेतृत्व करते हैं उन्हें नेता कहते हैं। ऐसे में राष्ट्र का नेतृत्व करने वाले का लोकप्रिय होना अति आवश्यक है क्योंकि तभी तो वो अपने विचारों और रणनीति से अन्य देशों को भी प्रभावित कर पाएगा।
  6. भूमि का क्षेत्र – किसी भी राष्ट्र को मजबूती प्रदान करने के लिए भूमि का क्षेत्र बहुत अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये ऐसा तत्व है जो राष्ट्र की Foreign policy के क्रियान्वयन में राष्ट्र की मदद करता है। इसकी साथ ही ये राष्ट्र को मजबूती भी प्रदान करने का काम करता है।
  7. जनसंख्या – सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण तत्व है जनसंख्या। किसी भी राष्ट्र को ऊपर उठाने और नीचे गिराने में इसका बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहता है। ये राष्ट्र की Policy के लिए हितकारी भी होता है और नुकसानदेह भी होता है। अगर किसी राष्ट्र की जनसंख्या ज्यादा होने के बाद भी उसकी सकल घरेलू उत्पाद या प्रति व्यक्ति आय सामान्य है तो यह उसके लिए लाभकारी सिद्ध होता है।

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Foreign policy के क्या लक्ष्य और उद्देश्य हैं?

इसके काफी सारे लक्ष्य और उद्देश्य हैं। इसके कुछ लक्ष्य और उद्देश्य निम्न हैं –

  1. राष्ट्र का हित – इसका सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यही तो होता है राष्ट्र का हित। Foreign policy का निर्माण ही राष्ट्रहित को देखते हुए ही किया जाता है। इसको एक शस्त्र की तरह से समझा जा सकता है कि ये एक शस्त्र है जिसके बिना कोई भी राष्ट्र बिना युद्ध किए ही अपनी सारी आवश्यकताओं को पूरा कर लेता है।
  2. आर्थिक लाभ – हां दोस्तों इससे आर्थिक लाभ भी कमाया जाता है। इसको इसी तरीके से Design ही किया जाता है कि इससे बाकी देशों से लाभ कमाया जा सके। इसीलिए इसके उद्देश्य में आर्थिक लाभ को भी शामिल किया गया है।
  3. राष्ट्र की सुरक्षा – इसके प्रमुख लक्ष्यों में से एक राष्ट्र की सुरक्षा भी है। इसीलिए जब भी Foreign policy तैयार की जाती है तो ये ध्यान में रखकर की जाती है कि राष्ट्र हर तरह से सुरक्षित रहे और उसकी सुरक्षा पर कोई भी आंच न आ सके।

दोस्तों तो ये थी Foreign policy से जुड़ी सारी जानकारी। इसको हर राष्ट्र बनाता है। इसको इसलिए बनाया जाता है ताकि राष्ट्र का कल्याण हो सके और बिना किसी लड़ाई झगड़े के आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके।

राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए ही इसको Design किया जाता है और फिर उसका क्रियान्वयन भी किया जाता है।

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