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Battery कितने प्रकार की होती है?

Battery कितने प्रकार की होती है?

Battery कितने प्रकार की होती है? Lithum ion vs lithium polymer: Battery के बारे में तो हम सभी जानते हैं कि यह क्या होती है। Exact शायद ही कोई इसे Define कर पाए लेकिन इसके बारे में पता लगभग सभी को होता है।

आज के तो हम सभी जानते ही हैं कि Digital है। अब जब Digital शब्द का इस्तेमाल हो रहा है तो बैटरी की बात न हो ऐसा कहां संभव है। अब Digital दुनिया मे आप सभी Internet का इस्तेमाल तो करते ही हैं। ऐसे में Internet को चलाने के लिए आपको कोई न कोई Device की ज़रूरत भी होगी। अब Device कैसे Run करेगा। उसके लिए बैटरी की Requirements भी तो होगी ही न। बिना बैटरी के किसी भी Device को चलाना आज संभव नहीं है। बच्चों के खिलौने से लेकर ड्रोन कैमरे तो हम आज इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

हर एक जगह आज के समय में Electrical energy का उपयोग हो ही रहा है। ऐसे में बिजली को जो आपूर्ति होती है वो Power grid के द्वारा की जाती है। लेकिन दोस्तों अब यह हर समय, हर जगह तो उपलब्ध हो नहीं सकता है। ऐसे में बैटरी की ज़रूरत पड़ती ही है। इसके अलावा भी बहुत सारी समस्याएं होती हैं जैसे काफी सारे ऐसे Devices होते हैं जिन्हें DC current यानी Direct current की नहीं बल्कि AC ( Alternate current) की ज़रूरत होती है। ऐसे में हमें एक ऐसे Source की आवश्यकता होती है जो Device की ज़रूरत के हिसाब से उसे Current प्रदान कर सके।

अगर किसी को AC करंट चाहिए तो उसे AC प्रदान करे और किसी को DC चाहिए तो उसे DC प्रदान करे। ऐसे में हम सब बैटरी का उपयोग करते हैं। इसका उपयोग करते हुए तो हम सभी लोगों ने देखा ही होगा। बच्चों के खिलौनों में, बसों में, ट्रेन में मोबाइल में, लैपटॉप में यहां तक कि अब बाजारों में Electric कार भी आ गयी है। ये कारें बैटरी से ही चलती हैं। बैटरी का हम छोटे से लेकर विशाल रूप आज इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में हम सभी के लिए यह आवश्यक है कि हम इसके बारे में जाने। इसीलिए आज यह लेख हम आप सभी के लिए खास लेकर के आए हैं। इसमें हम आप सभी को ये बताएंगे कि बैटरी क्या होती है और वो कितने प्रकार की होती है। चलिए फिर इसके बारे में जानना शुरू करते हैं।

Battery किसे कहते हैं?

ये कुछ और नहीं बल्कि एक Device होती है। यह एक ऐसी Device होती है जो कि दो या उससे अधिक Electro chemical cell से मिलकर बनी हुई होती है। इसमें हम Electric power supply देकर एक Chemical reaction करवाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि यह उस Electrical energy को Chemical energy के रूप में एकत्रित कर लेती है। फिर बाद में हम इसी Chemical energy को अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करते है।

आसान शब्दों में अगर हैं इसको समझने की कोशिश करें तो हम यह कह सकते हैं कि पहले हम एक बैटरी को Electric supply प्रदान करके उसे Charge करते हैं और उसके बाद उसे Load देकर हम उसे Discharge कर देते हैं। वैसे तो किसी भी Cell में जो संयोजक होता है उसी को बैटरी कह दिया जाता है। ये हम सभी जानते हैं कि एक Cell के पास Power बेहद कम होती है। इसीलिए अगर हम बहुत सारे Cell को Series या फिर Parallel में जोड़ दें तो फिर हम एक बहुत ही Powerful बैटरी का Formation कर सकते हैं।

बैटरी जो होती है वो Direct current supply करती है। इसीलिए हमें हमेशा ऐसे Device की ज़रूरत होती है जो DC को AC में Convert कर सके। यही कारण है कि इनवर्टर का इस्तेमाल किया जाता है। जब हम बैटरी को Electrical use के लिए इस्तेमाल करते हैं तो जो Current होता है वो Positive terminal से Negative terminal की ओर जाता है। इसी Process को Discharge process के नाम से जाना जाता है। वहीं जब बैटरी की Charging की प्रक्रिया होती है तो Current का जो Flow होता है वो Negative to positive होता है।

किसी भी बैटरी में Electrolyte plates के बीच में Chemical reaction होती है। इसी Reaction की वजह से ही Electricity पैदा होती है। इस Reaction को Oxidation reaction कहा जाता है। आसान शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि जो बैटरी होती है वो Chemical energy को Electrical energy में बदलती है। किसी भी बैटरी में दो तरह के Terminal होते हैं। एक होता है Anode और दूसरा होता है Cathode, जो Anode terminal होता है वो Positive होता है, वहीं जो Cathode होता है वो Negative होता है। जो Electrons होते हैं वो हमेशा ही Anode से Cathode की तरफ Flow करते हैं। दोस्तों अगर हम बात करें कि सबसे ज्यादा इस्तेमाल कौन सी बैटरी होती है तो वो है Lead acid, इसी को सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसका ज्यादा इस्तेमाल करने के पीछे का कारण है इसकी Recycling, इसका मतलब यह हुआ कि आप इसको बार बार Recharge कर सकते हैं। हमेशा याद रखिएगा कि किसी भी बैटरी को पहली बार धीरे धीरे Charge किया जाता है। क्योंकि पहली बार मे कम Current की आवश्यकता होती है।

Battery का आविष्कार किसने किया था?

Electric battery का जो आविष्कार है वो इटली के Scientist Alexandro volta ने किया था। इन्होंने जिस पहली बैटरी का आविष्कार किया था वो Non rechargable थी। इसका यह मतलब हुआ कि आप इसको दोबारा इस्तेमाल नहीं कर सकते थे और केवल एक ही बार इसका इस्तेमाल किया जा सकता था। इसको Benjamin franklin के द्वारा बैटरी नाम प्रदान किया गया था।

Battery के कुछ प्रमुख भाग कौन से हैं?

इसमें कई तरह के उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी उपकरणों को मिलाने के बाद बैटरी बनती है। ये उपकरण निम्न हैं –

◆ Electrolyte- इसी को हम नार्मल बोलचाल की भाषा में तेज़ाब के नाम से भी जानते हैं। ये एक Liquid की फॉर्म में होता है। इसमें Plates को डुबोकर रखा जाता है। जो Electrolyte होता है वो पानी और Sulphuric acid से मिलकर बनता है। इसी Electrolyte में ही जो Plates होती हैं उनके बीच में Chemical reaction होती है।

◆ Plates- किसी भी बैटरी के Container के अंदर Plates होती हैं। ये जो Plates होती हैं, ये Negative और Positive दोनों तरह की होती है। जो Negative plates होती हैं उनकी संख्या Positive plate से एक ज्यादा होती है।

◆ Container- ये किसी भी बैटरी की Outer layer होती है। इसी में जो बैटरी होती है वो सुरक्षित होती है। ये बहुत ही ज्यादा मजबूत होती है। इसी Container में ऐसे खांचे बने हुए होते हैं जिसमें Positive और Negative plates को अलग अलग रखा जाता है। यही सेपरेटर अगर किसी भी बैटरी में उपस्थित नहीं होते हैं तो उनमें Short circuit हो जाता है। जो Container होता है इसको ऊपर की तरफ से Cell cover से ढंका जाता है। यह काफी ज्यादा ठोस रबड़ से बना हुआ होता है। इसका काम होता है Electolytes और Plates को सुरक्षित रखना। इसी Cell cover के ऊपर ही Positive और Negative terminal लगाए जाते हैं।

Battery कितने प्रकार की होती है?

अभी हमने यह तो जान ही लिया कि बैटरी होती क्या है। चलिए अब जानते हैं कि यह कितने प्रकार की होती है। दोस्तों यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है जो कि निम्न है –

  1. Non rechargeable बैटरी- इसको आप Use and throw के नाम से भी जानते हैं। आप एक बार इनका इस्तेमाल कर लेने के बाद दोबारा इन्हें इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। अगर इनकी एक बार Power ख़त्म हो जाती है तो उसके बाद इनको Charge करना काफी मुश्किल होता है। इसके उदाहरण के रूप में आप घड़ी की बैटरी, टीवी रिमोट की बैटरी, टॉर्च की बैटरी आदि को ले सकते हैं। ये सभी बैटरियां Non rechargeable हैं, इनका एक बार आप इस्तेमाल करने के बाद दोबारा इनके चलने की कोई भी उम्मीद नहीं कर सकते हैं। इन्हें Primary battery के नाम से भी जाना जाता है। 
  2. Rechargeable बैटरी- ये ऐसी बैटरी होती हैं जिन्हें आप बार बार इस्तेमाल कर सकते हैं। इन्हें आप Charge करके बार बार इस्तेमाल कर सकते हैं। दोस्तों जो आप मोबाइल उपयोग करते हैं या फिर कोई भी ऐसा Device इस्तेमाल करते हैं, उसमें Lithium ion बैटरी का उपयोग किया जाता है। वहीं अगर बात करें इनवर्टर की तो उसमें भी हम Rechargeble बैटरी का ही इस्तेमाल करते हैं। इस तरह की जो बैटरी होती है उसमें Discharge और Recharge दोनों तरह का Process होता है। Discharge होने पर आप उन्हें Charge कर सकते हैं। इनको आप Secondary बैटरी के नाम से भी जानते हैं।

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Lithium ion और Lithium polymer बैटरी में क्या अंतर है?

अगर बात करें हम मोबाइल फोन की तो इन दिनों आपको आपके मोबाइल में दो तरह की बैटरी देखने को मिलती है। एक बैटरी होती है Lithium ion और दूसरी होती है Lithium polymer, इसी को हम कभी कभी Li-ion और Li-po के नाम से भी जानते हैं। आजकल जब भी हम नया फोन लेने के लिए जाते हैं तो हम हमेशा इस दुविधा में रहते हैं कि हम कौन सी बैटरी वाला फोन लें। तो ऐसे में हम सभी के लिए इनके बारे में जानना बेहद आवश्यक है।

दोस्तों हम जो भी Device इस्तेमाल करते हैं मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक बाइक,ई रिक्शा आदि इन सभी में ज्यादातर Lithium ion बैटरी का ही इस्तेमाल किया जाता है। इलेक्ट्रिक वाहन से लेकर रक्षा के और एरोस्पेस के उपकरणों तक में हम इन्हीं का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं अगर हम Lithium polymer की बात करें तो ये अभी नई नई विकसित हुई है। इसीलिए अभी इसको ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है और कुछ ही जगहों पर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है जैसे कि अभी कुछ Advance और नए स्मार्टफोन  तथा रेडियो कंट्रोल एयरक्राफ्ट आदि में इनका इस्तेमाल हो रहा है।

दोनों ही बैटरी फिर चाहे वो Lithium ion हो या फिर Lithium polymer, दोनों ही बैटरी Lithium धातु से बनी हुई होती है। इन दोनों ही बैटरी में हम Charging के लिए Lithium ions का उपयोग करते हैं। इनमें बस एक ही फर्क है वो यह है कि जो Lithium ion बैटरी होती है उसमें Liquid electrolyte का इस्तेमाल किया जाता है वहीं जो Lithium polymer बैटरी होती है उसमें Semi solid gel का इस्तेमाल एक Electrolyte के रूप में किया जाता है।

Lithium ion बैटरी में जो हम Liquid electrolyte का इस्तेमाल करते हैं, इसी की वजह से इन बैटरी की Body को Rigid और Solid रखना पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ Polymer बैटरी में Gel का इस्तेमाल किया जाता है जिसकी वजह से उन्हें Solid और Rigid रखने की कोई ज़रूरत नहीं होती है। इन्हें आप चाहें तो पतली Sheet की फॉर्म में या फिर Pouch की फॉर्म में भी रख सकते हैं। इसीलिए आपने देखा होगा कि जो Lithium polymer बैटरी होती है वो काफी ज्यादा लचीली होती है और आप उन्हें अपने हिसाब से किसी भी Shape में बदल सकते हैं।

Lithiun-ion बैटरी कैसे काम करती है?

ये आप सभी जानते हैं कि जो Cells होती है वो अलग अलग Sizes में आती हैं। लेकिन ज्यादातर Cells में तीन Basic components होते ही हैं जो कि होते हैं Electrode, electrolyte और Separator, इन Electrode का काम होता है Lithium को Store करने का। जो Electrolyte होता है वो Lithium ion को Electrode के बीच में ले जाता है। जो Separator होता है उसका काम होता Positive और Negative electrode को Separate करने का। बैटरी Cell से Energy electricity के रूप में निकलती है। ये तब निकलती है जब Lithium ion Negative electrode जिसे Anode के नाम से जाना जाता है से Positive electrode जिसे Cathode के नाम से जानते हैं कि तरफ़ Circulate करते हैं। वहीं जब Cell charge हो रहा होता है तो Ion cathode से Anode तक Opposite direction में Movement करते हैं।

Lithium-polymer बैटरी और Lithium-ion बैटरी की स्मार्टफोन को लेकर खूबियां और फर्क;-

चलिए देखते हैं कि ये दोनों एक दूसरे से किस किस तरह से अलग हैं। इनमें आपस में क्या क्या खूबियां और फर्क हैं।

◆ जो Lithium polymer बैटरी होती है वो हमारे फोन के अंदर पहले से ही होती है यानी कि ये In built होती है। इसे आप अपने आप नहीं बदल सकते हैं। अगर आप इसको बदलना या फिर निकालना चाहते हैं तो इसके लिए आपको Service center जाना होता है। कभी अक्सर क्या होता है कि हमारा फोन गिर जाता है, ऐसे में हमें बैटरी को लेकर टेंसन लेने की कोई ज़रूरत नहीं होती है। अगर फोन में Lithium polymer बैटरी होती है जो कि In built होती है वो वो फोन गिरने पर बाहर ही नहीं आ सकती है और सुरक्षित रहती है। इन बैटरी की Life भी काफी ज्यादा होती है जिसकी वजह से इन्हें आपको जल्दी बदलना भी नहीं पड़ता है।

◆ अगर आप Lithium ion बैटरी को इस्तेमाल नहीं करते हैं तो फिर वो कुछ वक्त के बाद अपने आप ही Discharge होने लगती है। वहीं अगर बात की जाए Lithium polymer की तो उसमें आपको ऐसी कोई भी शिकायत देखने को नहीं मिलती है। आप अगर अपना फोन इस्तेमाल नहीं करते हैं तो आपकी बैटरी सुरक्षित रहती है और न के बराबर ही Discharge होती है।

◆ Lithium ion बैटरी की तुलना में Lithium polymer बैटरी को ज्यादा Charge किया जाता है। यही कारण है कि इसकी जो Life होती है वो Lithium ion बैटरी से ज्यादा होती है।

◆ अगर हम Safety फ़ीचर्स को देखते हैं तो इस मामले में Lithium polymer बैट्री जो है वो Lithium ion बैट्री से अधिक सुरक्षित होती है। Over charge (100% चार्ज हो जाने के बाद भी बैट्री का चार्जिंग पोर्ट में लगे रहने) होने की स्तिथि में इसमें बैट्री नहीं फूलती है। अधिक तापमान पर Lithium ion बैट्री की तुलना में विस्फोट कर इसके फटने का खतरा एकदम नहीं के बराबर होता है।

◆ जो Lithium polymer बैटरी होती है उसके लिए कोई भी Rigid या Solid body की ज़रूरत नहीं होती है। इन्हें इसी वजह से एक पतली Sheet के रूप में भी बनाया जा सकता है और ज़रूरत के हिसाब से Shape प्रदान की जा सकती है। अगर बात करें हम वजन की तो Lithium polymer बैटरियां Lithium ion की तुलना में काफी हल्की होती है। इसीलिए आप किसी भी मोबाइल को हल्का और पतला बना सकते हैं।

Lithium polymer बैटरी हर मामले में Lithium ion से बेहतर है। यही कारण है कि आज लगभग हर जगह इसका इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।

दोस्तों तो ये थी बैटरी से जुड़ी जानकारी और Lithium ion और Lithium polymer बैटरी में अंतर। आप सभी स्मार्टफोन इस्तेमाल करते तो हैं ही। ऐसे में ये आवश्यक हो जाता है कि आपको इनके बारे में अच्छे से पता हो। जब तक आप इन्हें अच्छे से जानेंगे नहीं तब तक आपको पता ही नहीं चल पाएगा कि आपके लिए कौन सी बैटरी बेहतर है और कौन सी नहीं।

अभी तक लगभग हर फोन में Lithium-ion बैटरी का इस्तेमाल किया जा रहा था लेकिन इससे भी बेहतर है Lithium polymer बैटरी। इसीलिए अब Lithium ion बैटरी को Lithium polymer के साथ Replace किया जा रहा है। पहली बात तो ये है कि इनका वजन कम होता है और इन्हें Solid या फिर Rigid body की कोई ज़रूरत नहीं होती है, जिससे फोन के Size को हम Manage कर सकते हैं और Sleak और Slim फोन इस्तेमाल कर सकते हैं।

अगर फोन में Lithium ion बैटरी का इस्तेमाल होता है तो फोन तो बड़ा और भारी हो ही जाता है। इससे ऐसा लगने लगता है मानो आप चलता फिरता एक इन्वर्टर साथ लेकर चल रहे हों। साथ ही साथ जो Lithium polymer बैटरी उसकी Life भी Lithium ion की तुलना में ज्यादा है। Lithium ion बैटरी में होता क्या है कि जब पारा गिरता है तो बैटरी का Internal electrical resistance बढ़ जाता है। ऐसे में इसकी सख्त जरूरत है। मान लीजिए आपको Emergency में कहीं जाना हुआ तो आपको जगह जगह  बार-बार Charging slot ही खोजना पड़ेगा। ऐसे में अगर Polymer बैटरी का इस्तेमाल किया जाएगा तो ऐसे दिक्कत ज्यादा नहीं आएगी।

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