फेक बैंक कॉल क्या है, ये कैसे काम करता है?

आज के इंटरनेट, कंप्यूटर और मोबाइल के युग में जैसे-जैसे तकनिकी रूप से लोग सक्षम हो रहे है, वैसे-वैसे जालसाज़ी का भी खतरा बढ़ रहा है। जालसाज़ लोग न जाने क्या-क्या तरकीबें निकलकर आम लोगों को ठग रहे है। हम सोच भी नहीं सकते की कैसे-कैसे दिमाग लगाकर ये लोग सामान्य लोगों की मेहनत का पैसा हज़म कर जाते है। सबसे खतरनाक तो वो चीज़ है की आम लोग इन जालसाज़ों को आमने-सामने देख भी नहीं सकते। इन सबमे आम ठगी है “फेक बैंक कॉल “। 

तो अब हम ये जानेंगे की फेक बैंक कॉल क्या होती है और ऐसे कैसे अंजाम दिया जाता है?

फेक बैंक कॉल क्या है:

इस तरह के अपराध को “साइबर अपराध ” की लिस्ट में रखा गया है। आजकल  आपने कई साइबर अपराधों की खबर टेलीविज़न , न्यूज़ और न्यूज़ पेपर में देखा और पढ़ा भी होगा।

यह बहोत बड़ा रैकेट है जिसे आमतौर पर देश के अलग-अलग जगहों से संचालित किया जाता है ।  

सबसे पहले ये लोग अपने अलग-अलग नेटवर्किंग के माध्यम से लोगों के एकाउंट्स,मोबाइल नम्बर,क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड की  जानकारी जितनी ज्यादा हो, इकट्ठा करते है।

फिर यह साइबर अपराधी अपने आप  को बैंक का कर्मचारी या मैनेजर बता कर लोगो के क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के एक्सपायरी (expiry) को लेकर कर फेक कॉल करते है और बोलते है की किसी कारनवश आपको अपना कार्ड फिर से रेन्यू (renew) करवाना होगा, इसके लिए अकाउंट की जानकारी देनी पड़ेगी।

बस कई लोग इसी जाल  में फस जाते है और अपने बैंक अकाउंट की पूरी जानकारी देते है। 

फिर क्या? ये शातिर लोग आपका अकाउंट पूरी तरह से खाली कर देते है।

कभी- कभी साइबर अपराधी आपको अपने  आधार कार्ड को बैंक से लिंक और अपडेट करने के लिए फेक कॉल करते है।

और इस प्रोसेस में  कई लोग इसके भी शिकार होते है और अपना बैंक एकाउंट खाली करा बैठते है ।  

साइबर अपराधी लोगों में फ़ोन पर बात करने की महारथ हासिल होती है। उनका बोलने का अंदाज ही कुछ ऐसा होता है की दूसरी तरफ का व्यक्ति आसानी से उसके झांसे में आ सकता है।

इस तरह के साइबर अपराधी, लोगो को फ़ोन करके, अपने को किसी बैंक का मैनेजर बता कर लोगो से धोखाधड़ी करते है।

 ये अपराधी फेक कॉल करके आपको लालच देकर या डरा-धमकाकर आपकी सारी डिटेल और बैंक एकाउंट की सब जानकारी मांगते है जैसे :

  1. आपका क्रेडिट कार्ड अथवा डेबिट कार्ड का नंबर 
  2. उसके पीछे लिखा हुआ C.V.V. नंबर (कार्ड वेरिफिकेशन वैल्यू जो की 3 अंको की होती है) 
  3. कार्ड की समाप्ति तिथि और वर्ष 
  4. आपका ATM पिन नंबर 
  5. आपकी इंटरनेट बैंकिंग लॉगिन, यूजर नेम और पासवर्ड
  6. OTP (वन टाइम पॉसवर्ड)
  7. सिक्युरिटी पासवर्ड

एक बार जब आपके अकाउंट के बारे में सारी महत्वपूर्ण जानकारी आपके द्वारा इन साइबर अपराधियों को  मिल जाती है तो वे आसानी से इसी जानकारी की मदद से आपके बैंक एकाउंट से सारा रुपया पालक झपकते ही निकाल  लेते है। और आप कुछ नहीं कर सकते।

 इससे बचने का सबसे सही तरीका है है की जब भी ऐसी फेक बैंक कॉल आती है तब उसे काट दे और ब्लॉक कर दें, और पास के पुलिस स्टेशन में इसकी सुचना कर दे।

अपने बैंक अकाउंट की जानकारी , पासवर्ड, ATM पिन , इंटरनेट बैंकिंग यूजर नेम और पासवर्ड की जानकारी किसी को भी न दे।

 

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