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लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में क्या अंतर होता है?

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अंग्रेजों से आज़ादी के बाद हमने हमारी शासनव्यवस्था के लिए सांसदीय कार्यप्रणाली का स्वीकार किया। जिसके अंतर्गत शासनव्यवस्था को प्रमुख रूप से दो भागो में बांटा गया, पहली है केंद्रीय शासनव्यवस्था और दूसरी है, राज्यस्तरीय शासनव्यवस्था।

हमारे देश में संविधान को सबसे ऊपरी दर्जा दिया गया है। संविधान सर्वोच्च और मूल कानून है जिसे विभिन्न पश्चिमी गठन से निचोड़ कर देश के अनुरूप बनाया गया है। भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ। यह कहा जाता है कि संविधान अंग्रेज़ी भाषा में है और हिन्दी भाषा में इसकी प्रतिलिपि कानूनी रूप से स्वीकार्य है। हमारे देश में जो भी कानून बनते है, वे इस संविधान की मूल मर्यादा में ही बनते है, जिन्हे संसद पारित करती है। भारत में एक ही केंद्रीय शासनव्यवस्था है जिसे प्रमुखतः पार्लियामेंट या संसद चलती है और पार्लियामेंट के तीन प्रमुख घटक होते है:

1. राष्ट्रपति
2. लोकसभा या निचला सदन
3. राज्यसभा या ऊपरी सदन

इसके आलावा हमारे देश में संघीय प्रणाली का स्वीकार किया गया है जिसके तहत अलग-अलग राज्योंका निर्माण किया गया और उन राज्योंकी अपनी सरकारें है और उन राज्यों के कायदे-कानून का निर्माण जिसमे होता है, उस व्यवस्था में प्रमुख है:

1. राज्यपाल
2. विधानसभा
3. विधान परिषद् (छह राज्यों में)

राज्यों की यह संरचना, केंद्र की संरचना का छोटा रूप है।

लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा मे अंतर

हमारे देश को और उनमे सम्मिलित राज्यों को सुचारु रूप से चलने के लिए लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा यह तीनो सदनों का एक विशेष महत्त्व है। लेकिन इन इकाइयों में कार्यक्रम या अधिकार के रूप में काफी सारे अंतर है। आइये देखते है कि क्या अंतर है इन तीनो सदनों में।

1. लोकसभा और राज्यसभा केंद्रीय स्तर पर काम करती हैं। इसके सदस्यों को सांसद, खासदार या MP (मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट) कहा जाता है। विधानसभा और विधान परिषद, के सदस्य को विधायक, आमदार या MLA (मेंबर ऑफ़ legislative असेंबली) कहा जाता है।

2. लोक सभा या निचले सदन में लोगों द्वारा चुने गए 545 सांसद हैं और 552 सदस्यों का प्रावधान है। इसके चुनाव 5 साल में एक बार होते हैं। यह सबसे ताकतवर सदन है क्योंकि इसमें चुने हुए लोग सम्मिलित होते है। राज्यसभा या ऊपरी सदन में 245 सांसद होते है और इसके सदस्य विभिन्न राज्यों
के विधानसभा द्वारा मनोनीत हैं। यह 5 साल में लोक सभा की तरह कभी भंग नहीं होता है, 2/3 सदस्य हर 6 साल में सेवानिवृत्त होते हैं।

3. राज्य स्तर पर आपके पास विधानसभा होती है, जो लोकसभा के जैसे काम करती है। उनके सदस्य भी 5 साल के लिए लोगों द्वारा चुने जाते हैं। इसके आलावा विधान परिषद (जैसे राज्यसभा) होती है जो उनके सदस्यों को नामांकित करती है लेकिन भारत में हर राज्य में विधान परिषद नहीं है। सिर्फ़ छह राज्यों में विधान परिषद का गठन किया गया है। पहले यह सात राज्यों में थी लेकिन जम्मू-कश्मीर के राज्य को केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद, निम्नलिखित छह राज्यों में: आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश विधान परिषद अस्तित्व में रह गयी है।

4. लोकसभा को भारत की संसद का निचला सदन कहा जाता है। इसे सदन के लोगों के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसके सदस्यों को आम चुनावों के माध्यम से आम जनता द्वारा सीधे निर्वाचित किया जाता है। उन्हें लोकसभा सांसद के रूप में जाना जाता है। राज्यसभा को भारत की संसद का ऊपरी सदन कहा जाता है क्योंकि यहाँ के सदस्य सीधे आम लोगों के द्वारा नहीं चुने जाते। वे राज्यों के कोटा से चुने जाते है। उसमे राजकारणी लोगों के आलावा अलग-अलग क्षेत्रों के लोग जैसे कारोबार, खेल, सिनेमा, संगीत, साहित्य इत्यादी के लोग प्रतिनिधित्व करते है।

5. जिसप्रकार भारत के केंद्र में संसद में राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा घटक होते है इसी प्रकार से भारत के राज्यो में विधानसभा, विधानपरिषद और राज्यपाल प्रमुख घटक होते है।

6. लोकसभा चनाव के द्वारा में पूरे देश के लोकप्रतिनिधि चुन के आते है वहीं विधानसभा चुनावों में-में राज्य के जनप्रतिनिधि चुने जाते है। हालाँकि, राज्यसभा के लिए आम लोगों के द्वारा चुनाव नहीं होता।

7. विधानसभा राज्यो में होती है और लोकसभा पूरे देश के लिए होती है। विधानसभा में राज्य से सम्बंधित कानून बनाये जाते है तो लोकसभा और राज्यसभा में देश से सम्बंधित कानून बनाये जाते है।

8. लोकसभा वास्तविक कार्यकारी है जो प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में शासन चलाता है। उसीप्रकार राज्य में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शासन चलता है।

9. लोकसभा और विधानसभा के सदस्य आम जनता द्वारा वयस्क मतदान की प्रक्रिया के तहत चुने जाते हैं। लेकिन राज्यसभा के सदस्य राज्य विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं।

10. लोक सभा और विधासभा का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है। लेकिन यह स्थायी सदन नहीं है। इसमें कोई सरकार या उसका गठबंधन अगर बहुमत से कम हुआ तो सरकार गिर कर लोकसभा / विधानसभा भंग होती है। लेकिन राज्यसभा यह एक स्थायी सदन है जिसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो साल बाद रिटायर हो जाते हैं।

11. लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 है। राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 है। विधान्सभा की सदस्य संख्या हर राज्य के अनुसार अलग-अलग होती है।

12. धन विधेयक को केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है। यह सदन देश में शासन चलाने हेतु धन आवंटित करता है। धन विधेयक के सम्बंध में राज्यसभा को अधिक शक्तियाँ प्राप्त नहीं है, नाही उसपर चर्चा हो सकती है।

13. लोकसभा के बैठकों की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते है। विधानसभा में बैठकों की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष करते हैं लेकिन राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता उप-राष्ट्रपति करते हैं।

14. यदि कैबिनेट मंत्री द्वारा प्रस्तुत कोई विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाता है, तो पूरी कैबिनेट को इस्तीफा देना पड़ता है। यदि कैबिनेट मंत्री द्वारा प्रस्तुत कोई विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हो पाता है, तो पूरी कैबिनेट को इस्तीफा नहीं देना पड़ता है।

15. लोकसभा का सदस्य या विधानसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु-सीमा 25 वर्ष है। जबकि राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु-सीमा 30 वर्ष है।

16. भारत के राष्ट्रपति लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के 2 सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं। भारत के राष्ट्रपति राज्यसभा में कला, शिक्षा, समाजसेवा एवं खेल जैसे क्षेत्रों से सम्बंधित 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं।

17. भारत के प्रधानमंत्री लोकसभा का नेता होता है। उसीप्रकार राज्यों के मुख्यमंत्री उन राज्यों के विधानसभा के नेता होते है।

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