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Operating System के Types क्या हैं? (Windows vs Linux vs iOS)

Operating System के Types क्या हैं? (Windows vs Linux vs iOS) : कंप्यूटर की आज क्या Importance है, शायद ये आप में से किसी को भी बताने की ज़रूरत नहीं है। आज लगभग हर जगह इसका इस्तेमाल हो रहा है और सारा काम इसी की मदद से किया जा रहा है।

जब कंप्यूटर को Develop किया गया था तब तो यह सोचा भी नहीं गया था कि आने वाले समय में ये इतना ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगा। अब आज आप सभी खुद ही देख रहे हैं कि कंप्यूटर का क्या महत्व है।

आज आप किसी भी Job के लिए जाते हैं तो आपसे उसमें पहले ही पूछ लिया जाता है कि कंप्यूटर चलाना आता है या नहीं।

जिन लोगों ने कंप्यूटर कोर्स वगेरह किया होता है उन्हें इसके बारे में अच्छी खासी जानकारी होती है। लेकिन जिनका कभी कंप्यूटर Background नहीं रहता है, उन्हें भी इसके बारे में ज़रूर जानना चाहिए। क्योंकि सबको पता है आज का जो वक़्त है। कब आपको इसकी ज़रूरत पड़ जाए कहा नहीं जा सकता है।

अगर आप दुनिया से कदमों को मिलाकर चलना चाहते हैं तो भी आपको इसके बारे में जानना ही होगा। वरना कभी भीड़ में आपसे कोई System से जुड़ी हुई कोई चीज़ पूछ लेगा और आपको वो पता ही नहीं होगा। फिर आपको शर्मिंदगी महसूस होगी। इसीलिए पहले से खुद को Maintain करके चलें।

दोस्तों जो कंप्यूटर होता है वो अकेले खुद कोई काम नहीं करता है। उससे बहुत सारे Device connected होते हैं। इन सभी Devices का अपना अलग-अलग काम होता है। इनकी मदद से ही सारे काम कंप्यूटर में किये जाते हैं और कंप्यूटर भी अपने Devices पर पूरी तरह से निर्भर रहता है।

जो Device कंप्यूटर से जुड़े हुए होते हैं, उनको भी संभालने के लिए अलग से एक विशेष कंप्यूटर होता है। बस ये जो विशेष तरह का कंप्यूटर या फिर Programming होती है इसी को हम सभी Operating system के नाम से जानते हैं।

Operating system को आप एक तरह से कंप्यूटर का दिल या जान समझ सकते हैं क्योंकि बिना इसके आपका System कुछ भी नहीं है। आप सभी ने शायद एक Ad टीवी में देखा होगा जिसमें बच्चे कहते हैं ‘डब्बा है डब्बा, अंकल का टीवी डब्बा’। बस ठीक वैसे ही बिना Operating system के बिना कंप्यूटर भी डब्बा है डब्बा।

आप सबके मन में ये सवाल आ रहा होगा आखिर ये Operating system है क्या जिसकी हम बात कर रहे हैं। दोस्तों तो आज ऐसे ही सवालों के जवाब इस लेख में हम आपके लिए लेकर आए हैं। इसमें हम आप सभी को Operating system से जुड़ी जानकारी देंगे और साथ में हम आपको कुछ बेहतरीन Operating system जैसे Windows, linux और iOS के बीच में अंतर भी बताएंगे। चलिए फिर इनके बारे में जानना शुरू करते हैं।

Operating system क्या होता है?

ये एक ऐसा Software है जो किसी भी Device को चलाने में आपकी मदद करता है। आप जब भी अपना कंप्यूटर चलाते हो, तप उसमें भी आपको सबसे पहले Operating system ही देखने को मिलता है।

इसको हम लोग ‘OS’ के नाम से भी जानते हैं। इसी की मदद से तो आप अपने System को आराम से चला पाते हैं।

इसका काम होता है User और कंप्यूटर Hardware के बीच में Interaction करवाना। जब भी कोई नया Laptop या कंप्यूटर खरीदता है तो सबसे पहले वो उसमें Windows install करवाता है। ये जो Windows है ये भी एक तरह का OS ही है। जब System में Windows Install हो जाती है उसके बाद ही लोग कंप्यूटर या Laptop को घर ले जाते हैं।

अगर बिना Operating system के आप कंप्यूटर को चलाने की कोशिश करेंगे तो आपका कंप्यूटर On तक भी नहीं होगा। जो भी आप Input अपने कंप्यूटर को देते हैं, ये Operating system उसी को अलग-अलग Programs और Hardware devices की मदद से आपको Output प्रदान करने का काम करता है। इसीलिए इसको User और Hardware device के बीच की एक बहुत ही अहम कड़ी के तौर पर जाना जाता है।

Operating system के Types क्या क्या हैं?

Operating system के बहुत सारे Types होते हैं जो कि निम्न हैं –

  1. Distributed OS – Distributed OS में क्या होता है कि बहुत सारे Systems आपस में एक Network की मदद से  Interconnected होते हैं और एक दूसरे से Task को Share करते हैं। इनमें Multiple user की मदद के लिए और Real time sharing के लिए Multiple processor का इस्तेमाल किया जाता है। ये जो Processor होते हैं ये आपस में कम्युनिकेशन करने के लिए तरह तरह की कम्युनिकेशन लाइन का इस्तेमाल करते हैं। जब Sharing होती है तो CPU और Memory को छोड़कर सब कुछ Share किया जाता है। यही कारण है कि इनको Loosely coupled system के नाम से भी जाना जाता है।

 

  1. Nework OS – ये एक तरह से Networking के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें बहुत सारे Clients आपस में एक Server से जुड़े हुए रहते हैं। इसमें जो Server होता है वो बाकी सारे System यानी कि Clients को Manage करने औ उन्हें Security आदि प्रदान करने का काम करता है। इसमें आप किसी भी नए Software, technology को बहुत ही आसानी के साथ कंप्यूटरों में Update या फिर Replace कर सकते हैं। इस तरह के OS को Tightly coupled system के नाम से भी जाना जाता है।

 

  1. Multi tasking OS – ये Multi programming की तरह का ही एक OS है मगर इसमें और उसमें फर्क सिर्फ इतना है कि इस OS में Time sharing को भी शामिल किया गया है। इसमें होता क्या है कि हर एक काम को या फिर कह लीजिए Process को एक निश्चित Time period के लिए निष्पादित किया जाता है। इसके बाद फिर CPU अपना काम शुरू कर देता है और CPU फिर Main memory में पड़ी दूसरी Process को निष्पादित करना शुरू कर देता है। यहां पर ये काम इतनी तीव्रता से होता है कि User को ये समझ नहीं आता है कि इसमें CPU का भी कोई Role है। सबको यही लगता है कि जितनी भी Process चल रही है, वो सब एक साथ ही चल रही है। मगर दोस्तों ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है। जो CPU होता है वो एक समय मे एक ही Process को Run कर सकता है। मगर Processor इतना ज्यादा शक्तिशाली होता है कि सारे काम को एक साथ संभाल लेता है। इसीलिए ये जो निश्चित समय की अवधि होती है उसे Time quantum कहा जाता है और इस तरह के OS को Time sharing OS कहा जाता है।

 

  1. Multi programming OS – जब कंप्यूटर की Main memory में एक या एक से ज्यादा Processor को निष्पादित करने के लिए रखा जाता है तो उसी को Multi programming OS कहा जाता है। दोस्तों जब भी कोई भी Program आपके System में Run करता है तो उसे CPU के अलावा भी एक टाइम की आवश्यकता होती है जिसे Input / Output टाइम के नाम से जाना जाता है। जब भी कोई Process I/O को Invent करता है तो उस समय जो CPU होता है उसकी कोई भी जरूरत नहीं होती है और CPU idle तब भी बैठता नहीं है, उस समय ये एक कॉन्टेक्स्ट स्विच लेता है। तब ये Main memory में जो दूसरी Process होती है उसको चलाने का काम करता है। जब ऐसी होता है तो CPU कभी भी खाली नहीं रहता है।

 

  1. Real time OS – इस तरह के जो OS होते हैं वो Real time में काम करते हैं और इनमें CPU का जो Response टाइम होता है वो बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। इसमें Input और Output के बीच में जो समय लगता है वो बहुत ही ज्यादा कम होता है और इस समयावधि को Response time के नाम से जाना जाता है। इनका इस्तेमाल ऐसी जगह पर किया जाता है जहां पर टाइम को बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है। ये भी 2 तरह के होते हैं। पहला तो होता है Hard real time OS और दूसरा Soft real time OS होता है।

 

  1. Batch OS – इस तरह के जितने भी OS होते हैं उनमें End user तथा जो System होता है, उनके बीच मे किसी भी तरह का कोई भी Direct interaction नहीं होता है। अगर User को किसी भी Input को Process करना होता है तो इसके लिए उसे एक Job form को तैयार करना होता है। यहां पर Job का मतलब नौकरी से नहीं है। यहां पर Job का मतलब है Program से लेकर Input data, control interaction आदि सब लिखकर एक बंडल के रूप में तैयार करना। फिर इस Job को Punch card की मदद से Input कर दिया जाता है। फिर इन Jobs को Process करने के लिए एक Operator का इस्तेमाल किया जाता है।

 

  1. Multi processing OS – आप सबने देखा होगा कि जितने भी System होते हैं वो ज्यादातर एक ही CPU या Processor का इस्तेमाल करते हैं लेकिन जो Multi processing OS होता है उसमें Multi processor का इस्तेमाल किया जाता है। इन OS में ऐसे कई सारे Processor होते हैं जो Parallel में काम करने वाले होते हैं। इसमें जो CPU होते हैं, केवल उन्हीं को संख्या को बढ़ा दिया जाता है लेकिन जो बाकी सारे Hardware devices होते हैं वो एक ही होते हैं। ज्यादा CPU के होने का यह मतलब होता है कि एक ही समय में इसमें बहुत सारे Process को निष्पादित किया जा सकता है।

 

  1. Time sharing OS – इस तरह के OS में होता क्या है कि हर तरह के Process को निष्पादित करने के लिए एक निश्चित समय दिया जाता है। इनको Multi tasking OS के रूप में भी जाना जाता है। इसमें Task switching का जो समय होता है वो बहुत ही ज्यादा कम होता है। इससे होता क्या है कि दूसरे Task को बहुत ही कम समय तक इंतजार करना पड़ता है। इसमें ये भी होता है कि अगर किसी भी Task की प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो बाकी जो Task होते हैं उनके बीच का जो निर्धारित समय होता है वो बढ़ जाता है। इसकी सबसे मुख्य चीज़ यह है कि इसमें सभी काम को निष्पादित करने के लिए Equal time ही मिलता है।

ये तो बात की हमने OS के Types की। चलिए अब कुछ Popular OS के बारे में जान लेते हैं।

Windows –

Windows सुनने के बाद सबके मन में एक ही जवाब आता है खिड़की या चौखट। तो दोस्तों इसका नाम रखने के पीछे भी यही कारण है। ये Windows देखने मे किसी खिड़की या फिर चौखट की तरह ही नज़र आता है। इसकी मदद से आपके कंप्यूटर को एक बेहतरीन Look प्राप्त होता है।

इस शब्द का प्रयोग Microsoft के GUI यानी Graphical user interface OS के विभिन्न Windows के संस्करण के लिए किया जाता है। सबसे पहले ये Windows, DOS OS के अंतर्गत एक Software के रूप में Introduce किया गया था।

इसमें आपको लगभग हर सुविधा Picture format में मिलती है। Windows के अब तक बहुत सारे Variants मार्केट में आ चुके हैं। उस समय Window का जो 3.1 Variant आया था वो काफी ज्यादा Popular हुआ था। फिर 1995 में ये Windows 95 के तौर पर एक पूरा Operating system बन के आया।

अगर अब बात करें तो इसके बहुत सारे Variants जैसे Windows 95, windows 98, windows xp, windows 2000, windows vista, windows me, windows nt, windows 7, windows 8, windows 8.1, windows 10 तथा Windows 11 आ चुके हैं। अभी Present में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा कंप्यूटर्स में Windows operating system का इस्तेमाल किया जाता है।

◆ Windows के Types;-

इसके भी विभिन्न प्रकार हैं जो कि निम्न हैं-

  1. Single user OS – इस तरह के Window OS में होता क्या है कि एक समय में केवल एक ही User काम कर सकता है। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है कि ये Single user के लिए ही है। इसीलिए ये केवल एक ही System पर Run करता है।

 

  1. Multiple user OS – इसके भी आप नाम से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कैसा होगा। इसमें एक ही समय में बहुत सारे व्यक्ति काम कर सकते हैं। इसका आमतौर पर इस्तेमाल बिज़नेस, hospitals, schools, colleges आदि में किया जाता है।

 

  1. Multi tasking OS – इस तरह के Window OS में होता क्या है कि एक समय में दो या फिर दो से ज्यादा Programs को System पर Run कराया जाता है। इसका तो Example हम अपने मोबाइल में ही देख सकते हैं जिसमें हम एक समय में हम Internet भी Surf कर सकते हैं और Songs भी सुन सकते हैं।

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Linux-

Linux है वो सबसे ज्यादा लोकप्रिय और Multi operating system है। अगर आपने Unix OS के बारे में सुना है तो आप इसको आसानी से समझ सकते हैं।

Linux जो है वो Unix OS का एक बहुत ही लोकप्रिय Version है। ऐसा इसलिए क्योंकि Linux को Unix को ध्यान में रखते हुए ही Design किया गया है। यही कारण है कि दोनों के Functions आपस मे मिलते जुलते हैं। इसकी खासियत यह है कि ये बिल्कुल Free है और Open source operating system है।

इसका जो Source code है वो पूरे इंटरनेट पर Free में उपलब्ध है। ये Open source है इसीलिए जो Developers हैं वो इसको अपने हिसाब से Customize कर सकते हैं।

अगर बात करें कंप्यूटर की तो कंप्यूटर के लिए ये बहुत ही Reliable operating system है। इसकी एक और विशेषता यह है कि ये एम स्वतंत्र OS है, इसीलिए आप इसको किसी भी कंप्यूटर System पर इस्तेमाल कर सकते हैं। 

जब इसको बनाया गया था तो शुरुआत में इसको Personal कंप्यूटर्स के लिए बनाया गया था। फिर धीरे धीरे अलग अलग Platforms जैसे मोबाइल, Smart watch, smart tv, smart cars आदि में इसका इस्तेमाल किया जाने लगा। अब इस समय इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल कंप्यूटर System device और Server में किया जाता है।

आप सबके दिमाग में आ रहा होगा कि इसका भी कोई Full form होगा और अगर कोई पूरा नाम है इसका तो वो क्या है? तो दोस्तों ऐसा कुछ भी नहीं है। Linux खुद में ही एक पूरा नाम है।

◆ Linux OS के क्या-क्या Components हैं?

अगर मुख्य Components की बात करें तो मुख्य रूप से इसके 3 Basic components हैं जो कि निम्न हैं –

◆ System library – System library कुछ Special functions और Programs को कहा जाता है। इनका इस्तेमाल करके System utility kernel और Application program के Features को Access किया जाता है।

Operating system के सभी Functions को ये Libraries ही Implement करती हैं। इसके साथ ही System library को ऐसा करने के लिए किसी भो Kernel’s module code को Access करने के लिए Access rights की ज़रूरत भी नहीं होती है।

◆ System utility – जो Programs दूसरे Specialised और Individual level tasks को करने के लिए उत्तरदायी होते हैं, उन्हीं को System utility के नाम से जाना जाता है।

◆ Kernel – किसी भी Linux OS का Kernel core part होता है। किसी भी Operating system में होने वाली सारी Major activities के लिए यही उत्तरदायी होता है। इसी के साथ ही इसमें दूसरे और भी Modules मौजूद होते हैं। Kernel जो होते हैं ये Underlying hardware के साथ Direct interact करते हैं।

इनका काम होता है Low level hardware details को Application programs और Systems तक पहुंचने से रोकना। एक तरह से आसान भाषा मे कह सकते हैं कि ये Abstractions की तरह से Behave करता है।


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iOS –

इसको iPhone Operating System के नाम से भी जाना जाता है। इस Operating system को Apple inc. कंपनी के द्वारा बनाया गया है।

इस Operating System का इस्तेमाल करके आप केवल उन्हीं Devices का उपयोग कर सकते हैं जिन्हें Apple कंपनी ने बनाया होता है।

Apple द्वारा बनाए गए जो भी Device होते हैं उनके Normal fuctions से लेकर किसी Complicated programming तक को Run कराने में iOS हमारी मदद करता है।

इस Operating system में Multi touch interface का इस्तेमाल किया जाता है। इससे क्या होता है कि आप अपने Device को Single gesture से ही Operate कर सकते हैं।

इस OS को एक नहीं बल्कि कई सारी कंप्यूटर Language में Program किया गया है। इसकी इसी खासियत की वजह से ही इसको Android के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। 

इसको 2007 में पहली बार iPhone के लिए अलग से operating system के तौर पर Launch किया गया था। उस समय यह दावा किया गया था कि iPhone OS X desktop application को चलाता है, लेकिन जब इसको Release किया गया था तो इसका नाम iphone OS रखा गया था।

iOS का जो App store है इसे 2008 में Open किया गया था, उस समय इसमें महज़ 500 Applications मौजूद थीं, इसके बाद 2008 से लेकर 2017 तक इसमें 2.2 Applications हों गई थीं, लेकिन अब इसमें 2.5 मिलियन के आसपास Applications मौजूद हैं। इसके अलावा उसी साल 2007 में Apple कंपनी ने iPod को भी Launch करने का एलान किया था।

2010 जनवरी में Apple ने नए साल पर लोगों को नया तोहफ़ा दिया और iPad का एलान किया। iPad में iPod और iPhone की तुलना में Screen का जो Size था वो काफी बड़ा था। इसके बहुत सारे Versions अब तक Launch किये जा चुके हैं। इसके Version में iOS 1, iOS 2, iOS 3, iOS 4, iOS 5, iOS 6, iOS 7, iOS 8, iOS 9, iOS 10, iOS 11, iOS 12, iOS 13 शामिल हैं।


दोस्तों तो ये थी Operating system से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जिसके बारे में आप सबको पता होना चाहिए, क्योंकि आज के समय में जिसको इसके बारे में नहीं पता है वो दुनिया से काफी कदम पीछे है। इसीलिए अगर दुनिया से कदम मिलाकर चलना है तो इन सबके बारे में जानना ही होगा, जैसा कि हमने आपको इस लेख की शुरुआत में ही बताया था। उम्मीद है कि अब आप सभी को समझ में आ गया होगा कि Windows, linux तथा iOS में क्या फर्क है।

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Satwant Yadav: मैं अपने इस ब्लॉग पे इंटरनेट, मोबाइल, कंप्यूटर कैर्रिएर से रिलेटेड आर्टिकल पोस्ट करता हु और ये उम्मीद करता हूँ कि ये आपके लिए सहायक हो। अगर आपको मेरा आर्टिकल पसंद आये तो आप इसे लाइक ,कमेंट अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करे और आपको मुझे कोई भी सुझाव देना है तो आप मुझे ईमेल भी कर सकते है। मेरा ईमेल एड्रेस है – hindipost.net@gmail.com.