NGO क्या होता है और NGO कैसे काम करता है?

NGO क्या होता है और NGO कैसे काम करता है?

NGO क्या होता है:

NGO का इंग्लिश में अर्थ है नॉन गवर्नमेंट आर्गेनाइजेशन (Non Government Organization)।

जैसे कि नाम ही इंगित करता है कि यह एक ऐसा संगठन है जिसमे सरकार की कोई भी भूमिका नहीं होती है।

यह एक गैर-सरकारी संघटन है जिसे समाज के ऐसे लोग जिनके पास अच्छा पैसा या Business होता है वे मिलकर बनाते है। और इस NGO के माध्यम से प्रायः सामाजिक काम करते है।

NGO कैसे काम करता है:

NGO हर तरह के छोटे-मोठे सामाजिक काम करती है। जैसे-विधवा महिलाओ के लिए आवास, गरीब अनाथ बच्चों को पढाना, महिलाओ की सुरक्षा, जल संवर्धन, समाज में किसी बीमारी जैसे एड्स, कैंसर, कुपोषण, आदिवासी समाज की समस्याएँ आदि।

NGO का मुख्य कार्य ज़रूरत मंद गरीब तबके के लोगों की सहायता करना है. ऐसे लोग जो गरीब बेसहारा लोगों के दुःख-दर्द को समझते है वे लोग ऐसे कई सारे लोगों को ढूंढ ही लेते है जो इनके साथ-साथ ऐसे लोगों की मदद कर सके. NGO का उद्देश्य पैसा कमाना नहीं है बल्कि यह लोगों की मदद करने का काम करती है.

NGO का प्रमुख उद्देश्य “समाज का कल्याण” करना होता है। NGO के मुलभुत विचारधारा का विकास अमेरिका में किया गया था क्योंकि America में सरकार के अलावा बहुत से सामाजिक कार्य इन संगठनों के द्वारा किये जाते है।

वह के लोगों की ऐसी अवधारणा है कि मनुष्य का जन्म सिर्फ़ पैसे कमाने के लिए नहीं हुआ है अपितु उसे जनकल्याण का भी काम करना चाहिए। और इसके लिए ज़रूरत है एक सशक्त संघटन की।

यह ऐसा संगठन है जिसे कोई भी एक व्यक्ति एक व्यक्ति के द्वारा नहीं चलाया जा सकता इसे कम-से-कम 7 या इससे अधिक व्यक्तियों का समूह मिलकर चलाते है।

जैसे की बताया गया है कि NGO को किसी कंपनी की तरह यह लाभ लिए नहीं चलाया जाता या इसका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं । बल्कि इसे दुसरो के भले के लिए चलाया जाता है।

यदि किसी व्यक्तियों का समूह किसी क्षेत्र में सामाजिक कार्य या सामाजिक सुधार का काम करना चाहता है, तो वह Registered या बिना Register किये NGO के द्वारा इन कार्य को कर सकता है।

लेकिन Registered NGO से यह फायदा है कि आप इसमें सरकार से या अन्य कंपनी से सामाजिक कल्याण के लिए आर्थिक सहायता ले सकते है।

हमारे भारत में लगभग 1 से 2 मिलियन तक NGO होने का अनुमान है। भारत के सभी NGO केन्द्रीय सोसाइटीज एक्ट के अंतर्गत आते है जबकि राजस्थान में राजस्थान सोसाइटीज एक्ट बना है।

NGO के प्रति लोगों में अत्यंत आकर्षण है। इस समय हमारे देश में सक्रिय सूचीबद्घ NGO की संख्या एक रिपोर्ट के अनुसार 33 लाख के आसपास है। महाराष्ट्र में सबसे ज़्यादा करीब 418 लाख NGO है।

इसके बाद नंबर आता है आंध्रप्रदेश का यहाँ 416 लाख NGO हैं। उत्तर प्रदेश में 413 लाख, केरल में 313 लाख, कर्नाटक में 119 लाख, गुजरात व पश्चिम बंगाल में 117-117 लाख, तमिलनाडु में 114 लाख, उड़ीसा में 113 लाख तथा राजस्थान में एक लाख एनजीओ सक्रिय हैं।

इसी तरह अन्य राज्यों में भी बड़ी तादाद में गैर सरकारी संगठन काम कर रहे हैं। दुनिया भर में सबसे ज़्यादा सक्रिय एनजीओ हमारे ही देश में हैं।

NGO को कैसे स्थापित करे:

किसी भी NGO को शुरू करने से पहले देखे की आप जिस क्षेत्र में कम करना चाहते है वहा लोगों की मूल समस्याएँ क्या है। एक बार उसको पहचान लिया और उसके हिसाब से अपने NGO के उद्देश्य और मिशन को बनाना सरल हो जाता है।

एक बार आपके NGO के vision, missions, और objectives तय हो गए तो आगे का रास्ता सरल हो जाता है।

समाज के अंदर जिन लोगों को समस्याएँ है उनके हिसाब से काम करना होता है। क्योंकि बहुत से लोगों की समस्याओं को कोई नहीं सुनता।

इसलिए किसी भी NGO का यही उद्देश्य होना चाहिए की वह लोगों की परेशानी को समझे और उसके हिसाब से अपने NGO को शुरू करे।

गैर सरकारी संगठन को स्थापित करने से पहले ऐसे लोगों का समूह बनाये जो सभी Matter को जैसे वित्तीय प्रबंध, मानवीय संसाधन और नेटवर्किंग सभी तरह के कामों में निर्णय को लेने लिए responsible हो।

NGO शुरू काने के पहले तो आपको कुछ ज़रुरी Document की आवश्यकता होती है। जैसे-Trust Deed / Memorandum Of Association और Rules And Regulation / Memorandum And Articles Of Association और Regulation जैसे ज़रूरी Document होते है।

और इन तीन documents में से ही किसी एक document की आपको संगठन शुरू करने की ज़रूरत होती है। ऐसे bio-log भी कहा जाता है।

इन तीनों documents में से कौन से document की आपको आवश्यकता होगी यह आपके NGO के स्वरूप पर निर्भर होता है। इन्ही document के अंदर आपके NGO की पूरी detail होती है।

जैसे-NGO के सदस्य कितने है, NGO का उद्देश्य क्या है, NGO सर्वसाधारण लोगों को सदस्य कैसे बनाएगा, चुनाव प्रक्रिया, NGO के काम करने का तरीका और निष्कासन Rule आदि शामिल होते है।

इन Documents को आपको किसी भी जिले के स्थान में चैरिटेबल ट्रस्ट के ऑफिस में जमा करना पड़ता है।

बाद में आपके application की छानबीन होती है और आपका इंटरव्यू होता है।

अगर सब चीजें ठीक है तो आपके NGO का पंजीकरण उसी समय हो जाता है।

एक बार आपके NGO का पंजीकरण हो गया तो आपके NGO के नाम से अलग बैंक Account खुलवाना होगा।

इसके लिए आपके पास PAN Card होना चाहिए क्योंकि इसकी मदत से ही से आप बैंक अकाउंट खुलवा पाएंगे।

बैंक अकाउंट इसलिए Open करवाया जाता है क्योंकि यदि कोई Donation देता है तो वह NGO के Account में ही जाता है। और आपके सरे खर्चोँ की entries आपके बैंक अकाउंट होती है। जिससे कामकाज में पारदर्शिता आती है

भारत में गैर सरकारी संगठन के पंजीकरण करने की प्रक्रिया करने के लिए तीन अलग-अलग व्यवस्थाएँ है।

या हम ऐसा भी कह सकते है कि NGO को तीन अधिनियम में से किसी एक अधिनियम में पंजीकरण कर सकते है।

और ये तीन अधिनियम क्या है चलिए जानते है इसके बारे में।

  • Trust Act

हमारे देश में संघराज्य प्रणाली है। जिसके अंतर्गत अलग-अलग राज्यों में अपने Trust अधिनियम होते है।

लेकिन अगर किसी राज्य में कोई Trust अधिनियम नहीं है तो उस राज्य में 1882 Trust Act लागू होता है।

इस अधिनियम के अंतर्गत NGO में कम से कम दो Trustees होना आवश्यक है।

इस अधिनियम के अंतर्गत NGO का Registration करने के लिए आपको Charity Commissioner या Registrar के Office में आवेदन देना होगा।

Trust Act के अंतर्गत NGO Register करने के लिए आपको deed नामक document की आवश्यकता होती है।

  • Society Act

इस Act के अंतर्गत NGO के Registration के लिए Memorandum Of Association And Rules And Regulation Document की आवश्यकता होती है।

यह Document बहुत ही महत्त्वपूर्ण होता है इस Document को बनाने के लिए कम से कम 7 सदस्यों की आवश्यकता होती है.

आप NGO को Society के रूप में Register कर सकते है।

लेकिन कुछ राज्यों में जैसे-महाराष्ट्र राज्य में Society Act के तहत NGO को Trustee के तौर पर भी Registered किया जा सकता है।

  • Companies Act

Companies Act के अंतर्गत NGO का Registration करने के लिए Memorandum and Articles of Association and Regulation Document की आवश्यकता होती है.

इस Document को बनाने के लिए किसी भी प्रकार के स्टाम्प Paper की ज़रूरत नहीं होती है।

इस Document को बनाने के लिए कम से कम तीन सदस्यों का होना ज़रूरी है।

इस अधिनियम में गैर सरकारी संगठन को Companies Act के अंतर्गत Registration किया जाता है।

NGO में काम कैसे करे:

अगर आपको सामाजिक कार्य में रूचि है या किसी उद्दिष्य की पूर्ति के लिए आपको काम करना है तो उससे सम्भित NGO में आपको काम करना होगा।

इसके लिए आपको NGO का सदस्य बनना होता है इसके लिए हमने आपको उपर NGO की पंजीकरण Process में बताया है कि कैसे आप NGO के सदस्य बन सकते है।

किसी भी संस्था का सबसे पहला उद्देश्य समाज कल्याण और मानव कल्याण होता है।

निरंतर विकास की दिशा में काम करते रहना ही NGO का काम है जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आता है।

जैसे की बताया गया है कि NGO का मुख्य उद्देश्य सामाजिक कारणों पर कार्य करना होता है।

यह संघटन प्रायः समाज में सबसे निचले तबके के लोग है। उनके लिए काम करते है- जैसे कि गरीब अनाथ बच्चो को शिक्षा देना, बच्चो में किताबे बांटना, स्कूल के बच्चों के लिए अच्छा भोजन दिलवाना इत्यादि।

हमारे भारत में कुछ ऐसे गैर सरकारी संगठन ऐसे है जिन्होंने बहुत ही अच्छा काम किया है।

और अपने काम से देश का नाम रोशन किया है जानते है कुछ ऐसे NGO को:

  • Being Human (सलमान खान पुरस्कृत NGO)
  • Nanhi Kali (छोटी बच्चियों की शिक्षा)
  • Giveindia Foundation
  • Smile Foundation
  • Helpage इंडिया (बूढ़े लोगों की मदत)

NGO के लिए Fund जमा करने के लिए उसे कैसे प्रमोट करे:

आपके NGO की वेबसाइट बनाइये

आज के डिजिटल युग में वेबसाइट बनाना आवश्यक है जिससे लोगों को आपके NGO की पूरी जानकारी उस Website के द्वारा मिल सके।

आप अपने NGO के काम को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करते रहिये।

जिससे धीरे-धीरे लोगों का आपके NGO पर भरोसा बढ़ेगा होगा और वे आपके NGO को भविष्य में आर्थिक सहायता भी देंगे।

आप अपनी Website पर Donation Account बनाइये जिससे Direct आपके NGO Account में आ जायेगा.

विभिन्नकार्यक्रमोंकाआयोजन

आप अपने NGO के काम को किसी वर्कशॉप या सेमिनार द्वारा लोगों के बीच NGO के कार्यक्रम के द्वारा भी बता सकते है। जिससे वे लोग आपको आर्थिक सहायता देने के लिए प्रेरित हो।

अपने कार्यक्रम में किसी बड़े आदमी जैसे कि नेता, समाज सेवी, डॉक्टर, अभिनेता आदि को भी बुला सकते है जिससे वे लोग आपके NGO के लिए वित्तीय सहायता दे सके।

Govt Funds

सरकारी funds अगर आपको चाहिए तो सबसे पहले आपका NGO Registered होना ज़रूरी है।

हाँ आपको 2-3 साल तक अपने कार्यों का ट्रैक रिकॉर्ड बनाना होगा।

उसके पहले सरकार से आर्थिक सहायता लेने के लिए आपको कुछ Rules और Regulation को Follow करना होता है।

 Contact Private Companies

जैसे ही आप 2-3 साल काम करते है। उसके बाद आप प्राइवेट company को contact और mail करके अपने काम की जानकारी देकर उन्हें आगे के काम करने के लिए Donation करने के लिए प्रेरित कर सकते है।

कई बड़ी-बड़ी company में NGO के लिए कुछ रकम allot होती है।

अपने समाज सेवी कार्य को पूरा करने के लिए छोटे-छोटे NGO को donation देती है जिससे उन्हें टैक्स में रियायत मिलती है।

एक जमाना था जब इस क्षेत्र में आमतौर पर वे ही लोग आते थे। जो खुद के संसाधनों या सिर्फ़ दान वगैरह के बूते समाजसेवा करना चाहते थे। अब NGO भी रोजगार के बढ़िया साधन बन चुके हैं।

कभी-कभी कई दूसरी नौकरियों से भी अच्छे वेतनमान पर यहाँ काम मिल सकता है।

अगर किसी को अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले NGO में नौकरी मिल जाये तो यह एक फक्र की बात है साथ में समाज सेवा का सुकून तो मिलता ही है।

NGO को उसके काम करने का दायरा नाप कर आगे बढ़ाना होता है। इस कार्य को करने के लिए बहोत सारे धन और कुशल मनुष्यबल की आवश्यकता होती है।

NGO को अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम करना होता है  इसके लिए उन्हें समय-समय पर सरकारी या गैर-सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए आवेदन करना होता है।

प्रोजेक्ट के लिए आवेदन से लेकर प्रोजेक्ट मिलने के बाद उसको क्रियान्वित करने के लिए NGO को कुशल मनुष्यबल (trained manpower) की आवश्यकता होती है।

कुशल मनुष्यबल (trained manpower) से मतलब है ऐसे लोग जिन्हे सामुदायिक विकास, सामाजिक उद्यमशीलता, सामाजिक तानाबाना, वैश्विक मुद्दों की समझ, पर्यावरण, सूचना प्रबंधन, प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन, नेतृत्वशीलता आदि की समझ हो।

वैसे देखा जाये तो NGO चलाने के लिए किसी विशिष्ट योग्यता की अनिवार्यता नहीं है। परंतु जब कार्यकुशलता, व्यवस्थित प्रबंधन की बात आती है। खासतौर से रोजगार की संभावनाओं के संदर्भ में तो NGO को उसके काम करने की राह पर आगे बढ़ाना होता है।

इस कार्य को करने के लिए बहोत सारे धन और कुशल मनुष्यबल की आवश्यकता होती है।

समाज कल्याण विषय में मास्टर डिग्री Master of Social Work (MSW) अथवा समाजविज्ञान या ग्रामीण प्रबंध में कोई भी मास्टर डिग्री इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की दृष्टि से उपयोगी है।

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