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पंचवर्षीय योजना क्या होती है? भारत की पंचवर्षीय योजनाओं के बारे में पूरी जानकारी

पंचवर्षीय योजना क्या होती है? भारत की पंचवर्षीय योजनाओं के बारे में पूरी जानकारी

दोस्तों आज इस Article में हम आप सभी को पंचवर्षीय योजना के बारे में बताने जा रहे हैं।

ये तो आप सभी जानते हैं कि हर 5 वर्ष पर केंद्र सरकार के द्वारा लोगों में सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए इन योजनाओं की शुरुआत की जाती है।

चलिए जानते हैं इनके बारे में कि ये योजनाएं क्या होती हैं और भारत की पंचवर्षीय योजनाएं क्या हैं।

पंचवर्षीय योजना क्या होती हैं?

दोस्तों यह योजना भारत की राष्ट्रीय योजना होती है। अब इनको NITI आयोग के द्वारा संभाला जाता है लेकिन इससे पहले इन योजनाओं को योजना आयोग के द्वारा संभाला जाता था।

अगर बात करें NITI आयोग कि तो इसकी स्थापना 1 जनवरी 2015 को की गई थी।

NITI आयोग और योजना आयोग बस इतना सा फर्क है कि NITI आयोग के पास Fond grant करने का अधिकार नहीं है।

यह एक सलाहकार के रूप में काम कर सकता है एवं राज्यों की तरफ से कोई भी Decision नहीं ले सकता है।

जब से NITI आयोग का गठन हुआ तब से लोगों के हित मे काफी फैसले लिए गए और ये काफी हद तक Successful रही।

इससे देश में रहने वाले लोग Self dependent बन गए। इसके आने के बाद ही देश के नागरिक देश की लगभग सभी योजनाओं से अवगत हुए हैं। खैर चलिए अब जानते हैं कि पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत हुई कैसे।


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पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत कैसे हुई?

दोस्तों दुनिया में जो पहली पंचवर्षीय योजना लागू हुई थी वो सोवियत संघ में हुई थी। इसको अंग्रेजी शासक Joseph Stalin ने शुरू किया था। 

वहीं अगर बात भारत की हो तो भारत में पहली पंचवर्षीय योजना की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने की थी।

उनके कार्यकाल में ही पहली योजना आई थी। उन्होंने 8 जुलाई 1951 में पहली बार 5 Year plans को संसद में प्रस्तुत किया था।

ये निर्णय उन्होंने लोगों के आर्थिक विकास को देखते हुए लिया था। उस समय सिंचाई, बांध व अनाज की कमी, ये सब काफी महत्वपूर्ण मुद्दे थे।

इन योजनाओं के आने से देश मे एक खुशी की लहर दौड़ गयी थी क्योंकि आजादी के बाद देशवासियों को पहली बार उनके हित मे कोई फैसला आता हुआ दिखाई दिया था। इससे देश मे तरक्की तो हुई ही है।

पंचवर्षीय योजनाओं की क्या विशेषताएं हैं?

इनकी जो विशेषताएं हैं वो निम्न हैं –

  1. इन योजनाओं की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के द्वारा की गई थी।
  2. अब तक देश में 13 पंचवर्षीय योजनाओं को लागू किया जा चुका है।
  3. देश के विकास को देखते हुए इन योजनाओं को 5 साल तक चलाया जाता है। उसके बाद इनमें फिर कुछ Amendments किये जाते हैं और नई योजनाएं लागू की जाती हैं। 
  4. इसके लिए योजना आयोग का गठन किया गया था जो कि 15 मार्च 1950 में हुआ था।
  5. इन योजनाओं का Main aim होता है देश से गरीबी को दूर करना, देश को आर्थिक रूप से मजबूत करना, Self dependent बनाना, लोगों के लिए ज्यादा से ज्यादा Job opportunuties लाना। 
  6. 12वें 5 Year plans के बाद से अब इन Plans को बंद कर दिया गया है। अब पंचवर्षीय योजनाओं को नहीं लाया जाता है। NITI आयोग ने अब एक Draft action plan प्रस्तुत किया है। इस Draft action plan में 15 साल का Long term vision document तैयार किया गया है। जिसमें कि 7 Years की Strategy को तैयार किया गया है।

आइये अब सभी पंचवर्षीय योजनाओं पर एक नज़र डाल लेते हैं।

  • 1st 5 Year plan (हेराल्ड डोमर पर आधारित 1951 से 1956) – ये सबसे सफल योजनाओं में से एक थी। ऐसा इसलिए क्योंकि ये आजादी के बाद पहली योजना थी।

इससे सभी में एक खुशी की लहर दौड़ गई थी। इस योजना के तहत कृषि विकास पर ज्यादा ध्यान दिया गया था।

आजादी के बाद का समय तो सभी को पता ही है कि उस समय अनाज के लिए कितनी दिक्कत होती थी।

इसके साथ ही इस योजना में Dams पर भी ध्यान दिया गया। भाखड़ा नांगल Dam और हीराकुंड Dam को बनाने को भी इस उद्देश्य में शामिल किया गया।

इस योजना में सरकार द्वारा जो लक्ष्य तय किया गया था वो 2.1% था मगर इसकी जो वृद्धि हुई वो 3.6% की हुई थी।

  • 2nd 5 Year plan ( पी. सी. महालनोबिस Model पर आधारित 1956 से 1961) – पहली योजना जब समाप्त हुई तब दूसरी योजना की शुरुआत की गई।

इसका Focus industries पर किया गया। इसके प्रमुख कार्य थे घरेलू उत्पादन से औद्योगिक उत्पादन का विकास करना।

इस योजना के अंतर्गत भिलाई, दुर्गापुर, राउरकेला जैसे Steel plant mill शहरों में Hydro power और Heavy projects को स्थापित किया गया।

ये देश की उन्नति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इसी योजना के अंतर्गत 1957 में Scholarship को शुरू किया गया, इससे छात्रों को पढ़ने में मदद मिल सके। Coal के Production को इसमें और अधिक बढ़ा दिया गया।

  • 3rd 5 Year plan ( जॉन सैंडी तथा सुखमय चक्रवर्ती Model पर आधारित 1961 से 1966) – जो 3rd 5 Year plan था उसका Main obejctive था देश की Economy को गतिशील और देश के नागरिकों को Self dependent बनाना। इस योजना को गोडगिल योजना के नाम से भी जाना जाता है। इसी योजना के कार्यकाल में 1972 में पहले भारत और चीन युद्ध हुआ, इसके बाद 1975 में भारत और पाकिस्तान युद्ध हुआ। यही कारण है कि इसका उद्देश्य पूरा न हो सका क्योंकि युद्ध होने से Economy पर काफी असर पड़ा। Green revolution की शुरुआत इसी योजना के समय मे हुई थी। इसके साथ ही Dam और सिंचाई का कार्य जारी रखा गया। Chemical fertilizers और Cement का उत्पादन भी किया गया। गेंहू और कृषि के उत्पादन को बढ़ावा दिया गया। सरकार ने इसका जो लक्ष्य रखा था वो 5.6% रखा था, लेकिन इसकी जो वृद्धि हुई वो केवल 2.84% ही हुई।

जब तीसरी पंचवर्षीय योजना समाप्त हुई तो उसके बाद 1967-1969 तक कोई भी नई पँचवर्षी योजना सरकार द्वारा नहीं लागू की गई। इसको Plan holiday का नाम दिया गया।

  • 4th 5 Year plan ( अशोक रुद्र व ए. एस. मान्ने Model पर आधारित 1969 से 1974) – इस योजना के समय देश मे पहली महिला प्रधानमंत्री बनी इंदिरा गांधी। इंदिरा गांधी सरकार में ही देश के 14 बैंकों को राष्ट्रीयकृत बनाया गया। इस योजना की Planning योजना आयोग के उपाध्यक्ष D.P गाडगिल ने तैयार की। सरकार ने इसका जो लक्ष्य रखा था वो 5.7% रखा था परन्तु इसकी जो वृद्धि थी वो केवल 3.3% ही हुई थी। इसी योजना के तहत ही ISRO की स्थापना हुई। पिछड़े क्षेत्र में Industries को स्थापित करवाया गया। PDS (Public distribution system) का भी गठन इसी योजना के तहत हुआ था। इस योजना की प्राथमिकता थी दृढ़ता के साथ आर्थिक विकास।

 

  • 5th 5 Year plan ( D.P. धर Model पर आधारित 1974 से 1979) – इसमें कृषि विकास और उद्योगों के निर्माण को प्राथमिकता दी गई।

इसी योजना के तहत ग्रामीण बैंकों का निर्माण करवाया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य था देश से पूर्ण रूप से गरीबी को हटाना।

इसी के अंदर ही Social forestry की शुरुआत की गई थी। इसी के तहत Highway system को प्रस्तुत किया गया।

Traffic को बढ़ता हुआ देखकर सड़कों का चौड़ीकरण करने के लिए जानकारी को भी पेश किया गया। इस योजना का लक्ष्य 4.4% रखा गया और इसकी वृद्धि 4.9% हुई। यह योजना Succesful रही।

देश में Re election हुए थे जिसकी वजह से इंदिरा गांधी की जो सरकार थी वो मात्र 4 साल ही चल पाई थी।

इसके बाद मोरारजी देसाई नए प्रधानमंत्री घोषित किए गए। इसके बाद इन योजनाओं को खत्म कर दिया गया था।

इसी के तहत Gunnar Myrdal ने पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए एक Plan बनाया था जिसे Rolling plan के नाम से जाना गया। यह एक वार्षिक Plan था।

  • 6th 5 Year plan(1980 से 1985) – इस योजना के दौरान ही इंदिरा गांधी दूसरी बार प्रधानमंत्री के पद पर आई। इस योजना को दो बार तैयार किया गया था। 1978-1983 के कार्यकाल में पहली बार ‘अनवरत योजना’ को आरंभ किया गया था, मगर फिर इंदिरा गांधी सरकार द्वारा इसको समाप्त कर दिया गया था। जिसके बाद फिर छठी पँचवर्षी योजना में फिर से इसको शुरू किया गया था। इसी योजना के दौरान NABARD बैंक की स्थापना की गई थी। देश मे Economic liberalization की शुरूआत की गई। इसी योजना के समय में Family planning की शुरुआत की गई। इसी योजना में नागरिकों के रोजगार पर ज़ोर दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य था देश की गरीबी को खत्म करना और आर्थिक विकास करना। इस योजना का लक्ष्य 5.2% रखा गया था और इसकी वृद्धि 5.7% हुई थी।

 

  • 7th 5 Year plan (1985 से 1990) – इस योजना के अंतर्गत भोजन, काम और उत्पादन का नारा दिया गया था। हर व्यक्ति तक सामाजिक सेवा का लाभ पहुंच सके इसके लिए योजनाएं तैयार की गईं। Economy को मज़बूत बनाए रखने का कार्यक्रम जारी रखा गया। इसके तहत 3 मुख्य योजनाओं को लागू किया गया जो कि निम्न हैं-

◆ इंदिरा आवास योजना (1985-1986)

◆ जवाहर रोजगार योजना (1989)

◆ नेहरू रोजगार योजना (1989)

ग्रामीण क्षेत्रों का विकास किया गया। इसका लक्ष्य 5.0 रखा गया था मगर इसकी वृद्धि 6.01% तक हुई थी।

इसके बाद 8वीं पँचवर्षी योजना समय पर शुरू नहीं की जा सकी। इसके स्थान पर दो वार्षिक योजनाओं को लागू किया गया था जो कि 1990 से 1991 तक और 1991 से 1992 तक चली थी। इसी समय मे Small industries development bank of India (SIDBI) को स्थापित किया गया था। 1991 में आर्थिक सुधार की भी घोषणा की गई थी। जब ये सारी योजना समाप्त हुईं, उसके बाद ही आठवीं पँचवर्षी योजना को लागू किया गया।

  • 8th 5 Year plan- ( John W Miller Model पर आधारित 1992 से 1997) – इस योजना के तहत प्रधानमंत्री योजना की शुरुआत हुई थी। Human resources से जुड़े कार्यों के लिए नई नीतियां बनाई गई थीं। इसी के तहत आर्थिक नीति जैसे Liberalization, privatization तथा Globalization को मंजूरी मिली थी। इसको नरसिम्हा राव ने मंजूरी दी थी। इसका लक्ष्य था 15 से 35 वर्ष की आयु के लोगों में Illiteracy को खत्म करना। Population की वृद्धि हेतु कार्य किए गए। इसी योजना के तहत शिक्षा को प्राथमिकता मिली थी। इसका लक्ष्य 5.6% रखा गया था तथा इसकी वृद्धि 6.8% की हुई।

 

  • 9th 5 Year plan ( आगत निर्गत Model पर आधारित 1997 से 2002) – इस योजना को भारत की आजादी के 50 वर्ष पूरे होने पर लागू किया गया था। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य गरीबी को समाप्त करना, घरेलु संसाधनों द्वारा आत्मनिर्भर बनना, नए रोजगार के अवसर प्रदान करना था।देश की आर्थिक विकास इसकी प्राथमिकता थी। प्राथमिक संस्थानों का उचित और सही तरीके से उपयोग करना। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों को और अधिक बल देना इसका मकसद था। इसके अंतर्गत कई रोजगार की योजनाओं को बनाया गया जैसे प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना, स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना, स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना तथा जवाहर ग्राम सम्रद्धि योजना। इसका लक्ष्य 6.5 रखा गया था मगर इसकी वृद्धि 5.5% ही हुई थी।

 

  • 10th 5 Year plan (2002 से 2007) – इसके तहत जो जगह विकसित नहीं थीं, वहां पर लोगों को रोजगार प्रदान किए गए। इसका लक्ष्य था देश के हर एक नागरिक की आय को दोगुना करके आर्थिक स्तिथि को मजबूत करना। इसके तहत 2003 में सभी स्कूलों में बच्चों को Admit करवाया गया। 2007 में प्राथमिक शिक्षा को सबसे ऊंचा दर्जा प्राप्त हुआ। इसका एक और प्रमुख लक्ष्य ये था कि लोगों तक ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर प्रदान किये जाएं जिससे बेरोजगारी को खत्म किया जा सके। इसका लक्ष्य 8% रखा गया था और इसकी वृद्धि 7.7% की हुई थी। इसी बीच 2001 से 2011 के बीच देश की Population में 16.2% की कमी भी देखने को मिली थी।

 

  • 11th 5 Year plan (2007 से 2012) – इस योजना की Planning करने वाले रंगराजन थे। इस योजना के दौरान देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे।

11वीं पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य था विकास की गति को बढ़ाना तथा Inclusive तरीके आए विकास का होना।

इसी योजना के समय 2012 मे सभी नदियों एवं जल क्षेत्रों को साफ करने का निर्णय भी लिया गया।

इस योजना का Total budget 71731.98 रुपये था। नागरिकों के हित के लिए 3 नई योजनाओं को शुरू करवाया गया जिसमें निम्न योजनाएं शामिल हैं-

◆ राजीव आवासीय योजना

◆ प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना

◆ आम आदमी बीमा योजना

इस योजना की Theme रखी गयी थी जो ‘तेज़ और अधिक समावेशी विकास’ करना थी। इसके तहत ऊर्जा को और अधिक विकसित किया गया।

इसके साथ ही ये कोशिश भी की गई कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली को पहुंचाया जा सके। इसका एक इडडेये भी था कि सभी के लिए पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध करवाया जाए।

साल भर में विकास हेतु 9% का लक्ष्य रखा गया था। इसका लक्ष्य 8.1% रखा गया था, इसकी वृद्धि 7.9% हुई थी।

  • 12th 5 Year plan (2012 से 2017) – इसके तहत  ये लक्ष्य रखा गया था कि सभी ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के घरों में 2017 तक बिजली पहुंचाई जाए।

आर्थिक विकास के लिए 11वीं पँचवर्षी योजना का लक्ष्य 9% से घटाकर 8.1% कर दिया गया था। इसके तहत सभी को Banking की सुविधा के लिए जागरूक किया गया।

सभी के लिए पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना भी इसका एक लक्ष्य था। लड़का लड़की, अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़े वर्ग एवं अन्‍य लोगों के बीच असमानता को खत्म करना भी इसका एक मुख्य उद्देश्य था।

इसका लक्ष्य आर्थिक विकास के लिए सालाना 10% का रखा गया था।

12वीं पँचवर्षी योजना ही आखिरी पँचवर्षी योजना थी। इसके बाद केवल 5 साल के Defence plan को ही लागू किया गया।

मोदी सरकार जब अस्तित्व में आई तो 2014 में योजना आयोग को समाप्त कर दिया और उसकी जगह पर NITI आयोग को स्थापित कर दिया।

इसीलिए पँचवर्षी योजनाओं को अब समाप्त कर दिया गया है और 13वीं पँचवर्षी योजना को भी नहीं बनाया गया।

इसकी जगह पर Long term vision document को तैयार किया गया है। इसके तहत 7 साल की Strategy को तैयार किया गया है। इसी के अंतर्गत की Three year agenda को भी पेश किया जाएगा।

दोस्तों तो ये थी पँचवर्षी योजना से जुड़ी सारी जानकारी।। 12वीं पंचवर्षीय योजना के बाद अब इन योजनाओं को समाप्त कर दिया गया है और 2017 के बाद से किसी भी पंचवर्षीय योजना को लागू नहीं किया गया है।

वहीं दूसरी तरफ 2014 से योजना आयोग को  बदलकर NITI आयोग कर दिया गया है। उम्मीद है कि आपको ये सारी बातें समझ में आ गयी होंगी।

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