No cost EMI क्या होता है?

दोस्तों जब से Online का Trend आया है तब से लोगों के अंदर बहुत सारे Changes आ गए हैं। एक समय था कि कोई भी Credit card नहीं बनवाना चाहता था और आज जितने भी Employed लोग हैं उन में से ज्यादातर लोगों के पास Credit card मौजूद है। Credit card के फायदे भी काफी हैं।

Online shopping करने वाले लोगों के लिए या फिर Online payment कहीं भी आपको करना है तो आप बिना किसी संकोच के Credit card से कर देते हैं।

अब आप किसी भी चीज़ का Permanent इस्तेमाल करेंगे तो जाहिर सी बात है आपको कुछ न कुछ Profit तो मिलेगा ही।

Credit card से Payment करने पर आपको कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। उन सुविधाओं में आपको एक सुविधा मिलती है No cost EMI की।

इस तरह के EMI में न तो आपको किसी भी प्रकार का कोई ब्याज देना होता है और न ही कोई Processing fees देनी होती है।

बस जिस Rate पर आपकी खरीदी गई वस्तु होती है आपको उसी Rate को एक Fixed समय के अंदर उसे EMI के तौर पर देना रहता है।

आपको क्या देना होता है मतलब आपके Account से उतना पैसा कटता जाता है जितना आपकी EMI बनी होती है।

हम जानते हैं कि बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें No cost EMI के बारे में बिल्कुल पता नहीं है और इसी के चलते वो लोग इसका फायदा नहीं उठा पाते हैं।

आज हम आपको इस Article में बताएंगे कि No cost EMI होता क्या है और ये आपके लिए फायदेमंद है या नहीं।

 No cost EMI क्या होता है:

ऐसा दोस्तों कई बार होता है कि आपका कोई चीज़ खरीदने का मन होता है लेकिन Budget low होने की वजह से आप वो चीज़ चाह कर भी नहीं ले पाते हैं।

आप अगर कहीं जाते हैं और बच्चे साथ हों और किसी चीज़ को लेने की ज़िद करें तो आप अक्सर उन से निराश होकर बोल देते हैं कि, ‘बेटा अभी नहीं, अभी Budget allow नहीं कर रहा है, बाद में ले लेना।’

बहुत बार या फिर कह लीजिए आए दिन आपको ऐसी Situations से Deal करना ही पड़ता है।

तो दोस्तों जब ऐसी Situations होती हैं तब आपके लिए सबसे फायदेमंद साबित होता है EMI, EMI की मदद से आपको सारा Payment एक साथ नहीं करना पड़ता है बल्कि आप किसी भी चीज़ को खरीदने के बाद किश्तों में उसका Payment करते हैं।

EMI भी दोस्तों कई प्रकार की होती है। एक तरह की EMI होती है No cost EMI, इस तरह की EMI लोगों के लिए काफी बेहतर होती है।

इस तरह की EMI में आपको किसी तरह का न ब्याज देना होता है और न ही कोई Processing amount आप से Charge किया जाता है। आपको बस उतना ही Pay करना होता है जितने का आपका सामान होता है।

आइये इसको हम एक Example से समझते हैं। चलिए मान लीजिए कि आप ने कोई चीज खरीदी जिसका Price है 10,000 रुपये तो उसकी आप ने 5 महीने की EMI बनवाई है तो आपको हर महीने उसके लिए 2,000 रुपये देने होंगे और 5 महीने में आप 10,000 रुपये पूरे दे देंगे।

न ही आपको कोई ब्याज देना होगा और न ही कोई अन्य Extra amount, जितने का आपका खरीदा हुआ सामान होगा आपको बस उतना ही Amount pay करना होगा।

वरना बाकी सारी EMI में आपको खरीदी हुई चीज की कीमत तो चुकानी ही पड़ती है उसके साथ ही भारी ब्याज भी देना होता है।

No cost EMI किस तरह से काम करती है:

ये जानना हम सबके लिए काफी महत्वपूर्ण है कि आखिर ये No cost EMI का काम करने का Process क्या है। आइए तो जानते हैं-

असल मे No cost EMI जैसी कोई चीज़ है ही नहीं। ऐसा कहीं भी होता है क्या कि आप किसी से उधार लें और वो ब्याज न ले।

No cost EMI में बस आपको दिखता नहीं है कि आप ब्याज नहीं दे रहे हैं मगर आपको ब्याज देना पड़ता है।

जिन लोगों ने Marketing पढ़ा होगा उन्हें इसकी असल समझ होगी।

Marketing को बढ़ाने के लिए और Customers को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए ही कंपनियां No cost EMI जैसी चीज़ो को लाती हैं।

जिस तरह से कम्पनियां साधारण EMI पर ब्याज लेती हैं उसी तरह से No cost EMI में भी कम्पनियां कहीं न कहीं ब्याज जोड़ लेती हैं और सारा Amount add करने के बाद ही Product का Price fix किया जाता है।

ये 2 तरह से काम करता है। पहला तो ये कि कंपनी आपको सबसे पहले No cost EMI का Option देती है और उसके बाद जब आप उस Product को खरीदने के बारे में सोचते हैं तो आपको उसके एकमुश्त Payment करने के Discount के बारे में बताया जाता है, वहीं अगर आप उस Product को खरीदते हैं तो आपको पूरा Amount देना होता है।

दूसरा तरीका ये है कि Product का जो भी Cost होता है उससे जुड़ा ब्याज उसी Cost में Add कर लिया जाता है।

ऐसा इसलिए भी है क्योंकि RBI ने अभी तक Zero percent interest के लिए कोई Permit नहीं जारी किया गया।

No cost EMI को लेकर RBI का क्या बयान है:

RBI का मानना है कि कोई भी Loan ब्याज मुक्त नहीं होता है। अगर आप ने Loan लिया है तो जाहिर सी बात है आपको वो ब्याज के साथ वापस भी करना होगा।

अगर बात करें 17 सितंबर 2013 के सर्कुलर की तो उसमें बताया गया है कि, ‘Credit Card Outstanding पर Zero percent EMI स्कीम में ब्याज की रकम की वसूली अक्सर Processing fee के रूप में कर ली जाती है।

2013 में ही RBI ने Zero percent EMI पर प्रतिबंध लगाया था जिसके बाद से No cost EMI का प्रचलन बढ़ गया है।

No cost EMI को क्यों चुनें:

असल मे दोस्तों ये No cost EMI का चलन बैंकों या फाइनेंसियल कम्पनियों ने नहीं बल्कि Online shopping platforms amazon तथा Flipkart आदि ने शुरू किया है।

इसमें होता क्या है कि ये कम्पनियां आपको Discount देती हैं जो कि बैंकों द्वारा वसूल किये जाने वाले ब्याज जितना ही होता है।

यही कारण है कि आपको EMI के अतिरिक्त ब्याज के पैसे आपको नहीं देने होते हैं।

No cost EMI को क्यों नहीं चुनें:

कई बार होता यूं है कि हम No cost EMI की चक्कर मे पड़ जाते हैं और सामान महंगा खरीद लेते हैं।

ऐसे में हमारा Budget ही बिगड़ जाता है। इसके अलावा अगर आप Credit card bill की Last date तक Bill pay नहीं करते हैं तो आपको Fine भी देना होता है।

इसके अलावा कई बार Cash देने के बाद आपको Product को खरीदने पर उस पर मिलने वाला Discount EMI पर मिलने वाले ब्याज से अधिक हो।

दोस्तों अब तो आप सब समझ ही गए होंगे कि ये No cost EMI होता क्या है। असल मे इस तरह की कोई चीज़ बनी ही नहीं है मगर 2013 में जब से RBI ने Zero percent interest को प्रतिबंधित कर दिया है तब से कम्पनियों ने No cost EMI से Customers को लुभाना शुरू किया है।

No cost EMI में आप सभी से Product के Price में ही ब्याज की कीमत ले ली जाती है। अब आप आप पर Depend करता है कि आप No cost EMI पर कोई Product लेना चाहते हैं या नहीं।

कई बार आपको No cost EMI में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है जब कि Real में वो Product उतने का होता ही नही है।

ऐसे में आपको Products के Rate की सही जानकारी होनी चाहिए नहीं तो आपको लेने के देने पड़ सकते हैं।

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