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Gateway क्या है तथा ये कैसे काम करता है?

Gateway क्या है तथा ये कैसे काम करता है?

दोस्तों आज का हमारा जो Topic है वो Gateway है। आज हम जानेंगे कि एक Network system में इसका क्या Role होता है।

यहां अभी ऐसे बहुत ही कम लोग होंगे जिन्हें इसके बारे में जानकारी हो। हो सकता है आपको इसके बारे में पता हो!

अगर दोस्त आप इसके बारे में जानते हैं तो भी बहुत अच्छी बात है। अगर आपको इसके बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है तब भी कोई दिक्कत नहीं है।

आज इस Article में आपकी इससे जुड़ी जो भी कोई Query होगी वो दूर हो जाएगी। जिसको इसके बारे में पता होगा भी, वो लोग भी अगर इस Article को पढ़ेंगे तो उनकी Knowledge बढ़ेगी ही। इसीलिए ये काफी महत्वपूर्ण होने वाला है।

वैसे दोस्तों अगर आप इसके बारे में जान रहे हैं तो आप ये बता सकते हैं कि ये किस तरह से काम करता है?

दोस्तों अगर आपको Gateway समझना है तो इसके लिए आपको अपने घर को अच्छे से समझना होगा।

मेरा मतलब ये है कि आज आपको इसकी तुलना अपने घर के Main gate से करनी है। ये एक Junction की तरह काम करता है।

इससे ही Permit होने के बाद ही कोई भी Network के अंदर जा पाता है या फिर Network से बाहर आ पाता है।

Internet में इस्तेमाल होने वाला वो Node जो कि एक Stopping point भी होता है, उसे हम सब Host node के नाम से जानते हैं और इसी Host node को ही हम Gateway भी कहते हैं।

दोस्तों जो ये Gateway node होता है ये उस कंप्यूटर को कहा जाता है, जो किसी Company के Network को या फिर ISP के Traffic तथा Band width को Control और Manage करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

वैसे ज्यादातर जो ISP होते हैं वो खुद ही अपने Users को Gateway की सुविधा प्रदान करते हैं। इससे क्या होता है कि जो आपका Internet होता है वो बहुत ही आसानी से Connect हो जाता है। 

अगर एक सरल से भाषा मे इसको समझने की कोशिश की जाए तो ये आपके घर के Main gate की तरह ही कंप्यूटर Network में Entrance का काम करता है।

ये एक ऐसा Point होता है जिससे Network को Access किया जा सकता है। इसको एक Inter operating system की तरह से भी जाना जाता है।

इसकी एक Capacity होती है कि ये एक समय मे बहुत सारे Network को Handle कर सकता है। इसका कोई Fixed form नहीं है।

ये आपको किसी भी Form में देखने को मिल सकता है। ये Software भी हो सकता है तो कहीं कहीं पर ये Hardware भी हो सकता है। 

दोस्तों जो Gateway node होता है, उसका Function किस भी Enterprise network में होता है एक Firewall का या फिर एक Proxy server का।

यही कारण है कि आज हमने आपको ये Topic इस Article से समझाने के बारे में सोचा। आइये जानते हैं फिर कि आखिर ये Gateway जिसकी हम इतनी देर से बात कर रहे हैं, वो है क्या।

क्या होता है Gateway?

किसी भी दो Networks के।अंदर Gateway एक Gate की तरह से काम करता है। ये एक Hardware device होता है।

ये आपका Router, firewall, server या फिर कोई भी इसी तरह का दूसरा Device हो सकता है जो कि किसी भी Network में Traffic को In तथा Out होने के लिए Enable करता है। ये Internet की तरह ही Wider area network भी हो सकता है।

ये एक Junction की तरह से काम करता है। ये अलग अलग Protocols से दो Networks को Connect करता है।

ये तो आप सभी जानते होंगे कि किसी भी Network system में Bridge ल क्या Role होता है।

जैसे एक Bridge दो Similar networks को Connect करने का काम करता है। बिल्कुल उसी तरह से जो Gateway होता है वो दो तरह के Dissimilar networks को जोड़ने का काम करता है।

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि ये Gateway ही होते हैं जिनकी वजह से हम Data को Back and forth भेज सकते हैं।

अगर आप किसी भी Gateway का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो आप Internet का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते हैं। कभी कभी तो आप बिना Gateway के Hardware और Software को भी नहीं इस्तेमाल कर सकते हैं।

ये एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर पर Data share करने के लिए अनुमति प्रदान करता है। इसको एक Protocol converter के तौर पर भी जाना जाता है। जो कि एक OSI model layer पर Perform करता है।

अगर आप इसकी तुलना एक Router या Switch से करें तो इसका काम थोड़ा सा ज्यादा Typical होता है।

दोस्तों आज के समय मे हमारे पास Router और Server मौजूद हैं, इसीलिए ये शब्द Internet से जुड़ी सभी चीज़ों में काफी प्रचलित हो गया है।

जब भी हम किसी भी Technical help से Connect होते हैं तो नियमित रूप से हम इसी का सामना करते हैं।

आप Internet gateway, Email gateway तथा Network gateway में उलझ सकते हैं। इसीलिए अब हम इसके बारे में और विस्तार से जानेंगे।


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Gateway किस तरह से काम करता है?

इसका इस्तेमाल करके आप बहुत सारे Network का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिसकी वजह से बहुत सारे काम Online किये जा सकते हैं जैसे कि Website browse करना, Social media का इस्तेमाल करना, Online shopping करना आदि।

ये Network का इस्तेमाल करने के लिए Network को In तथा Out करने का काम करता है। जब भी हम Internet से Connected होते हैं तो उस समय Signals को पहले Gateway से होकर गुजरना पड़ता है।

ये एक Network point होता है जो कि दूसरे Network को Access करने के लिए सहायक होता है।

अगर बात करें Intranet की तो उसमें आमतौर पर एक Node या फिर Gateway node हो सकता है। या फिर ये भी कह सकते हैं कि जो Network में शामिल होने वाले Node होते हैं वो Gateway होते हैं।

अगर आप किसी Bde Organisation में गए होंगे तो आपने वहां देखा होगा कि वहां पर कंप्यूटर Organisation traffic को Control करने का काम करते हैं।

ये जो Traffic control करते हैं, ये Gateway nodes ही होते हैं। जैसे कि एक ISP के द्वारा एक समय मे अलग अलग Users को Internet connect करने के लिए उपयोग किए जाने वाले कंप्यूटर को Gateway node ही कहते हैं। 

अगर किसी Business कम्पनी की बात करें हम यहां पर तो उसमें जो Server होता है वो एक Gateway node की तरह से काम करता है।

कभी कभी ये Firewall हो सकता है या फिर Proxy server भी हो सकता है। अगर आप चाहें तो फिर एक Gateway को Router से भी Connect कर सकते हैं। चलिए अब जानते हैं कि Gateway कितने Types के होते हैं।

Gateway के अलग अलग Functions क्या  होते हैं?

दोस्तों ये आपको कई Forms में देखने को मिलते हैं। इसी तरह से इनके काम भी कई प्रकार के हो सकते हैं। इसीलिए इस आधार पर इनके निम्न Functions होते हैं –

  1. Amazon API gateway- इसमें एक Developer को Non AWS application को AWS बैक-एंड रिसोर्सेस से Connect करने की अनुमति देता है।
  2. Email security gateway- इसमें कम्पनी Policy को तोड़ने वाले या फिर दुर्भावनापूर्ण के इरादे से Transfer होने वाले Email को रोका जाता है।
  3. VoIP trunk gateway- इस तरह के Network में आपको Voice के साथ साथ Telephone या पुराने पड़े Telephone services devicesजैसे कि Landlines आदि को इस्तेमाल करने की सुविधा दी जाती है।
  4. Media gateway- इसमें एक Format से Data को दूसरे Format में बदला जाता है। इससे Communication आसान हो जाता है।
  5. Cloud storage gateway- विभिन्न Cloud storage services API कॉल के साथ Storage request को Translate करता है।
  6. Web application firewall- इस तरह के Gateway Web server से Traffic को Filter करते हैं तथा Application layer data को देखते हैं।
  7. IoT Gateway- इसमें Sensor data को एकत्रित किया जाता है। Protocol sensor के बीच Translate करता है। फिर Data को आगे भेजने से पहले उन्हें Process किया जाता है।
  8. API, SOA or XML Gateway- ये In और Out traffic को Manage करने का काम करता है। Micro service oriented architecture तथा XML based Web service को Manage करता है।

Gateway कितने Types के होते हैं? 

आप चाहे जिस तरह के Network gateway का इस्तेमाल कर लीजिए, सबका Function के ही होता है।

इनका इस्तेमाल आप घरों में या फिर छोटे बिज़नेस में करते हैं। ये Network में होने वाले सभी Devices को तथा LAN को Connect करता है।

Network gateway के Types;-

  1. छोटे बिजनेस या फिर घरों में एक Broadband router एक Network gateway की तरह Typically server करता है। ये Internet से सभी Devices को Connect करता है जो आपके घरों में होते हैं या फिर बिजनेस में होते हैं। जो Routers होते हैं वो सबसे आम प्रकार के Gateways में आते हैं।
  2. ऐसी जगहों पर जहां पर Dial up internet का इस्तेमाल होता है, वहां पर भी एक Router ही Gateway होता है। ये ज्यादा Famous नही है क्योंकि जो Dial up Internet है उसका Access अभी काफी कम हो गया है।
  3. बहुत से ऐसे छोटे बिजनेस होते हैं जिसमें एक कम्प्यूटर की ज़रूरत होती है जो एक Gateway ली तरह से काम कर सके। यहां पर Routers की ज़रूरत नहीं होती है। इस तरह के Network में दो Network Adapters की ज़रूरत होती है। एक को Local network से Connect किया जाता है, वहीं दूसरे को Internet के साथ Connect किया जाता है।

Gateway का इस्तेमाल Protocol converter के रूप में;-

एल तरह से दोस्तों ये Network protocol converter भी होते हैं। कई बार ऐसे Network जो अलग अलग Base protocol का इस्तेमाल करते हैं उन्हें एक ही  Gateway join करने का काम करता है।\

यहां पर जो Gateway होता है वो दो Protocols के बीच Compatibility प्रदान करता है। इस तरह के जो Network gateways होते हैं वो OSI model के किसी भी Level पर Operate कर सकते हैं।

Gateway security क्या होती है?

एक Safeguard के हिसाब से ये Gateway एक Local network का काम करता है। इसके अलावा ये एक Public network को Local network के साथ Connect करने का काम भी करता है।

ये जो होता है ये एक तरह की Security offer करता है जैसे कि Firewall जिसमें NAT जैसी Techniques का इस्तेमाल किया जाता है।

Gateway facilitating machine वो भी local internet protocol addresses के साथ इस्तमाल होता है internet को access करने के लिए via Gateway का inclusive address, Gateway प्राप्त करता है

packets local network से और साथ में ये alternate करता है इसके exterior IP address को और एक नयी port address को IP and UDP headers के resource fields में।

Gateway devices क्या होते हैं?

दोस्तों इसमें बहुत तरह के Devices होते हैं। ये सारे ही बहुत ज्यादा Essential parts होते हैं। यही Device signal translators में system interoperability को Available बनाते हैं।

इसके अन्य Devices हैं Fault isolators, Rate converters, Inpedance matching devices तथा Protocol translators आदि।

कभी कभी जो Gateway होते हैं वो Switch और Routers दोनो के साथ Connect हो जाते हैं जिससे कि  किसी भी Action को आसानी से Perform किया जा सके।

जो सबसे Common और Popular gateway है इस समय वो एक Router ही है। ये एक घर या Enterprise network को Internet से Connect करने का काम करता है।

Gateway के क्या क्या Uses हैं?

दोस्तों इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है।

आइये एक नज़र इसके Use पर भी डाल लेते हैं। इसके जो Use हैं वो निम्न हैं –

  1. ये अपनी Client devices को Supervise करने का काम करता है। ये अपने Clients के Data को पहले इकट्ठा करता है और उसके बाद उन्हें दूसरे Task को Execute करने का काम करता है। ये बहुत से Varity की Computer networks को Net client को Access करने के लिए Allow करता है। 
  2. अगर आप चाहें तो एक Stand alone device में भी एक Gateway को Install कर सकते हैं। ये TCP/IP internet में Local और Wide area protocols के बीच मे एक Interface की तरह से काम करता है। 
  3. अगर बात करें एक Network gateway की तो ये एक Firewall या Filters packets की तरह से काम करता है। ये एक Corporate network को Public network जैसे Intranet से Separate करने का काम करता है।
  4. किसी भी Telephonic communication में ये एक Key mechanism होते हैं। ये Internet और Telephone network के बीच मे एक Bridge के तौर पर काम करते हैं।
  5. ये Real time communication में Audio conversion को Support करते हैं, साथ ही Carry out करते हैं Extinction को, इसके साथ ही Call setup भी करते हैं। इनका काम Processing information को Control करना भी होता है। ये Network के Across Information को Control करते हैं, जिसमें कि Information होती है जो कि एक End to end call को Setup करने की कगार पर होती है। 
  6. आप एक Gateway को चाहें तो एक Hardware या Software के तौर पर Implement कर सकते हैं। कभी कभी तो आप दोनों के Mixture के तौर पर भी इन्हें Implement कर सकते हैं। ऐसे बहुत सारे Techniques और Equipments हैं जिन्हें Process किया जाता है जैसे Data communication और Voice आदि। 
  7. किसी भी Dissimilar network में एक Multimedia communication को Achieve करने के लिए Gateway से बेहतर Option कोई दूसरा हो ही नहीं सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर Network के अलग अलग Characteristics और Protocol होते हैं।

Gateway और Router के बीच क्या अंतर है?

इन दोनों के बीच मे अंतर को जानना बहुत ज्यादा जरूरी है। वरना आप दोनों को एक ही समझने की गलती कर सकते हैं।

जो Routers होते हैं वो एक ही तरह के Network के बीच मे Traffic को Regulate करने का काम करते हैं।

वहीं जो Gateway होते हैं वो दो प्रकार के Networks के बीच मे Traffic regulate करते हैं। यही कारण है कि ये बहुत ज्यादा Felxible होता है।

Gateway जो होते हैं वो Dynamic routing को Support नहीं करते हैं। वहीं Routers जो होते हैं वो Dynamic rouring को Support करते हैं। 

Router जो होता है वो OSI model के Layer 3 और 4 पर काम करता है और जो Gateway होता है वो OSI model के Layer 5 पर काम करता है। 

आप Router को केवल समर्पित Application पर ही Host कर सकते हैं। वहीं अगर बात की जाए Gateway की तो आप इसे समर्पित Application, virtual application या भौतिक Server पर भी Host कर सकते हैं।

Gateway के क्या क्या Advantages होते हैं?

इसके Use के बारे में तो आप सभी ने जान लिया। चलिए अब जानते हैं कि इसके Advantages क्या क्या हैं।

दोस्तों एक Gateway का इस्तेमाल किन्हीं दो कंप्यूटर्स को आपस मे Connect करने के लिए किया जाता है।

ये ऐसे कंप्यूटर्स को जोड़ता है जिनकी Protocols अलग अलग होती हैं। इसकी वजह से वो Computers एक दूसरे से बहुत आसानी से Communicate कर लेते हैं।

यही कारण है कि कभी कभी इसको Communication gateway के नाम से भी जाना जाता है।

कभी कभी क्या होता है कि हम अपने Computer को दूसरे Operating system और Functions के साथ Connect करने के बारे में सोचते हैं।

ऐसे में ये गेटवे3हमारे लिए काफी लाभदायक साबित होता है। इसके साथ ही इन्हें Troubleshoot करना भी काफी कठिन होता है।

खैर आइये अब एक नज़र इसके Advantages पर भी डाल लेते हैं।

इसके Advantage निम्न हैं –

  1. Security बढ़ाने का काम करता है- इनको आप इस तरह से Program कर सकते हैं कि ये किसी User privilages को Deny या फिर Grant कर सकें। दोस्तों ये User authentication को भी Allow करता है। इसका मतलब ये है कि एक Password या फिर दूसरा कोई भी Security का Form बहुत ज्यादा आवश्यक है, इससे पहले कि अगर एक User के पास इसका Access मौजूद हो। ये Sensitive information वाली चीज़ों के लिए काफी ज्यादा Helpful होता है क्योंकि इसमें केवल Privilaged user के पास ही Information को Access करने की सुविधा होती है या कह लीजिए Permission होती है। लगभग सभी Networks में इस प्रकार की Security featured होती है जिससे कि Unwanted access को दूर ही रखा जा सके।
  2. Flexible है- एक Router की मदद से कुछ Computer को Setup किया जाता है। किसी भी Router को उन Computers में इस्तेमाल किया जा सकता है जिसमें Similar protocols का इस्तेमाल किया जाता है। Similar से यहां हमारा मतलब है जिनमें एक ही तरह के Hardware और Software का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं जो Gateway होता है वो आपके Network को बहुत ज्यादा Flexible बनाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये Computers की जो भी Information है उसको Translate कर सकती है जो कि अलग अलग Systems से होते हैं। यानी कि एक समान Gateway में बहुत से प्रकार के कंप्यूटर को Set up किया जा सकता है। इसके साथ ही प्रत्येक कंप्यूटर से समान Information को Access भी किया जा सकता है।

Gateway के Disdvantages क्या क्या हैं?

इसके Advantage के बारे में तो आप सभी ने जान लिया।

अब चलिए जानते हैं कि इससे होने वाले Disadvantages क्या क्या हैं –

  1. Troubleshooting करना काफी मुश्किल होता है- ये जो Device होता है ये बहुत ही Rigid process को Follow up करता है। इसीलिए आप इनको आसानी से Program नहीं कर सकते हैं। इनके लिए कंप्यूटर में Problem खोजते वक़्त वो भी अलग अलग Protocols में अलग अलग Tools की ज़रूरत होती है इसीलिए इन्हें सही ढंग से Troubleshoot करना काफी मुश्किल होता है। किसी भी Network में अगर Gateway fail हो जाता है तो Communication वहीं के वहीं समाप्त हो जाती है। इसके बाद आप तब तक Communication को दोबारा Set up नहीं कर सकते हैं जब तक कि आप Gateway की Problem को Locate न कर लें। इसका ये मतलब होता है कि आपको Network के अंदर उपलब्ध हर एक Computer से होकर गुजरना पड़ेगा Problem को खोजने के लिए। आपको Individually ही उन्हें Troubleshoot करना होगा जब तक कि आप असली Problem की तह तक न पहुंच जाएं।
  2. Time delay होता है- किसी भी Information को आगे Pass up करने से पहले Gateway को हमेशा Information को अलग अलग Protocols में Translate करना होता है। यही कारण है कि Gateway network में Time delay न चाहते हुए भी हो ही जाता है। जब आप एक Gateway network का इस्तेमाल करते हैं तो उस समय आप एक Instant tranfer के बारे में तो भूलकर भी नहीं सोच सकते हैं और न ये इस Network में संभव ही है। ज्यादातर समय मे एक Gateway पुरानी Information या फिर Catched information को ही Deliver करती है। ये Information gateway में ही Stored होते हैं। अगर आप Cache को सही प्रकार से Clear नहीं करते हैं तो आपको ये Information मिल जाती है। इसीलिए आपका और भी समय बर्बाद हो जाता है, जब आप इसका इस्तेमाल कर रहे होते हैं तो। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अगर आप Cache को Clear करते हैं तो उसके लिए आपको कुछ न कुछ समय तो चाहिए ही होता है न।

दोस्तों तो अब आप सब समझ ही गए होंगे कि Gateway क्या होता है। ये Hardware, software या फिर इनका Mixture भी हो सकता है।

आजकल इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल होने लगा है। आप Gateway को एक Router से ही समझ सकते हैं।

अगर आप Internet इस्तेमाल करते हैं तो आपको इसकी जरूरत पड़ेगी ही। बिना इसके आपका Internet किसी भी काम का नहीं होता है।

किसी भी Working place पर या Network पर एक Gateway वो होता है जो किसी कार्य केंद्र से बाहरी Network पर Traffic को Route करता है। उम्मीद है कि आपको इसके बारे में सब कुछ समझ आ गया होगा।


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