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क्या है PFI संगठन?

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जब भी देश मे कोई भी हिंसा पैदा होती है या फिर कोई भी विवाद हो या कोई भी ऐसा मौका रहा हो जिससे देश का माहौल खराब हो रहा हो, उसमें सबसे पहले जिस संगठन का नाम आगे आता है वो है PFI, हमने हमेशा ही PFI का नाम सुना है और देखा भी है कि कैसे बाबरी मस्जिद विध्वंस से लेकर अभी हाल ही में हुए हाथरस कांड में PFI की एक अहम भूमिका रही। देश मे कोई भी गतिविधि होती है तो उसके लिए PFI को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है। 

कुछ समय के लिए PFI का मामला शांत हो गया था मगर जब से हाथरस कांड का मामला सामने आया है तब से एक बार फिर ये PFI संगठन सुर्खियों में आ चुका है। दावे ये किए जा रहे हैं कि PFI ने ही एक मोटी रकम ऐंठी है और प्रदेश में माहौल खराब करने का जिम्मा लिया है। मगर PFI अपने मकसद में नाकामयाब रही। खुफिया एजेंसियों ने PFI को उनके मकसद में सफल होने नहीं दिया।

हमने PFI के बारे में सुना तो हमेशा ही है और ये भी देखा कि क्यों इन्हें हमेशा हर चीज़ के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाता है मगर हम में से बहुत ही कम ऐसे लोग हैं जो जानते हैं इस PFI संगठन में बारे में। आज हम आप सबने इसी संगठन की जानकारी देने वाले हैं। आइये देखते हैं कि क्या है ये PFI संगठन।

क्या है PFI संगठन?

यह एक इस्लामिक संगठन है। अगर बात करें इसकी full form की तो इसकी full form है (Popular front of India), ये संगठन खुद को पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के लिए आवाज़ उठाने वाला बताता है। इस संगठन की स्थापना हुई थी 2006 में। उस समय इसकी स्थापना New Development Front (NDF) के उत्तराधिकारी के रूप में हुई थी। इसकी जड़ें सबसे ज्यादा मजबूत केरल के कालीकट में हैं। इसका Headquarter दिल्ली के शाहीन बाग में बताया जाता है। यह वही शाहीन बाग है जहां NRC और CAA के विरोध में पूरे 100 दिनों तक पूरे देश मे सबसे लंबा आंदोलन चला था। 

जैसा कि हमने बताया कि PFI एक मुस्लिम संगठन है इसीलिए इसकी सारी गतिविधियां इस्लाम धर्म और मुस्लिमों के इधर उधर ही घूमती रहती हैं। बहुत सारे ऐसी Situations भी सामने आईं हैं जब इस संगठन से जुड़े हुए लोग मुस्लिमों के Reservation के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। ये संगठन उस समय सबसे ज्यादा सुर्खियों में बना था जब 2006 में दिल्ली के रामलीला मैदान में इनकी तरफ से National Political Conference का आयोजन किया गया था। इस Conference में एक बड़ी तादाद में लोग उपस्थित हुए थे।

अगर बात करें अभी की तो इस समय इस संगठन की जो जड़ें हैं वो देश के 24 राज्यों में फैली हुई हैं। कुछ राज्यों में इसके सदस्य ज्यादा Active हैं तो वहीं कुछ राज्यों में बहुत कम सदस्य Active हैं। ऐसे राज्य जिनमें मुसलमानों की संख्या अधिक है वहां पर ये संगठन ज्यादा Active है। ये संगठन समय समय पर इस बात का दावा करता है कि ये न्याय, स्वंतत्रता और सुरक्षा का पैरोकार है। मुस्लिमों के अलावा अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों के लिए भी इसने समय समय पर मोर्चे शुरू किए हैं।

इस PFI संगठन ने NDF के अलावा तमिलनाडु के मनिथा नीति पारसराई, कर्नाटक के फोरम फ़ॉर डिग्निटी, गोआ के सिटीजन्स फोरम, राजस्थान के कम्युनिटी सोशल एंड एजुकेशनल सोसाइटी, आंध्रप्रदेश के एसोसिएशन ऑफ सोशक जस्टिस सहित अन्य कुछ संगठनों के साथ मिलकर इसने हर राज्य में अपनी पकड़ और मजबूत की है। इस संगठन की कई Branches भी हैं। स्टूडेंट्स के लिए Campus front of India और महिलाओं के लिए National Women’s front हैं। जब से इसकी स्थापना हुई है तभी से इस पर देश विरोधी और समाज विरोधी गतिविधियों के आरोप लगते हुए आए हैं। 

PFI का विवादों से है बरसों पुराना नाता;

PFI को SIMI यानी Students Islamic Movements of India का बी विंग भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब 2006 में इस 1977 मे बने SIMI संगठन पर बैन लगाया गया तभी एक नया संगठन जिसने अल्पसंख्यक, दलितों, आदिवासियों और मुसलमानों की अधिकार का जिम्मा उठाया और उसी का नाम PFI रख दिया। इस संगठन की कार्य प्रणाली एकदम SIMI से मेल खाती है। समय समय पर इस संगठन को भी बैन करने की मांगें उठती रही हैं।

2012 में भी इसको बैन करने की मांग उठी थी और खुद केरल सरकार ने इसका बचाव करते हुए कोर्ट में ये कहा था कि ये संगठन SIMI से अलग है और कुछ मामलों में सरकार का विरोध करता है। केरल पुलिस ने PFI के सदस्यों के पास से बम, हथियार, सीडी जैसे ऐसे तमाम दस्तावेज बरामद किए थे जिनसे ये बयान हो रहा था कि ये संगठन अल कायदा तथा तालिबान का समर्थन करता है। ज्यादातर लोगों मे ऐसा मानना है कि ये जो PFI संगठन है वो एक आतंकवादी संगठन है और इसके अलग अलग तार अलग अलग अलग संगठनों के साथ जुड़े हुए हैं।

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